बीएचयू में 16 फरवरी से स्वयं पोर्टल के 122 कोर्स की शुरुआत हो जाएगी। वहीं, दो अतिरिक्त कोर्स का संचालन बीएचयू और जर्मनी की सरकार मिलकर करेगी। सिलेबस, क्लास और कंटेंट आदि का सहयोग लिया जाएगा। पहला कोर्स फाउंडेशन ऑफ डिजिटल आंत्रप्रेन्योरशिप और दूसरा डिजिटल मार्केटिंग और ब्रांडिंग इनोवेशन का होगा। इन कोर्स में 28 फरवरी तक मुफ्त नामांकन कराया जा सकता है। वहीं, परीक्षा की फीस 750 रुपये देनी होगी। अभी तक 3000 अभ्यर्थियों ने दाखिला ले लिया है। कोर्स 4-4 सप्ताह का होगा। इससे पहले शुक्रवार को बीएचयू के प्रबंधन अध्ययन संस्थान में कोर्स तैयार करने को लेकर दो दिन की कार्यशाला की शुरुआत हुई।
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स्वयं के एंबेसडर भी बनाए जाएंगे
बीएचयू-जीआईजेड कोर्स विकास और संचालन योजना के नाम से इस कार्यक्रम में आए कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि डिजिटल युग में सिर्फ पारंपरिक ब्रिक-एंड-मोर्टार मॉडल पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। स्वयं जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की भूमिका को बढ़ाकर शिक्षा का विस्तार करना फायदेमंद होगा। शिक्षण को सक्षम बनाने में एआई का भी सहयोग लेना होगा। वहीं इस काम को राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाने के लिए एंबेसडर भी बनाए जाए।
डिजिटल स्किल्स टू सक्सीड की परियोजना प्रमुख प्रियंशी मणि ने इंडो-जर्मन सहयोग से उच्च शिक्षा और कौशल विकास को समझाया। कहा कि जीआईजेड ने भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के साथ साझेदारी कर बीएचयू और इग्नू के साथ मिलकर स्वयं प्लेटफॉर्म तैयार किया है। यह पहल न केवल भारत के लिए बल्कि अन्य देशों के लिए भी एक आदर्श मॉडल के रूप में विकसित हो सकती है। इससे एआई-सक्षम अकादमिक-उद्योग सहयोग बेहतर होगा।
देश भर में स्वयं कोर्स के संचालन का नेतृत्व कर रहे बीएचयू इकाई के समन्वयक प्रो. आशुतोष मोहन माइक्रो-क्रेडेंशियल यानी कि छोटे कोर्स के क्रियान्वयन के लिए बीएचयू को नामित किया जाएगा। 16 फरवरी से शुरू हो रहे कोर्स में डिजिटल एंटरप्रेन्योरशिप, डिजिटल मार्केटिंग और ब्रांडिंग जैसे विषयों को शामिल किया गया है।
प्रबंधन अध्ययन संस्थान के निदेशक प्रो. आशीष बाजपेयी ने कहा कि बीएचयू में डिजिटल शिक्षा और कौशल-आधारित मॉडल को मजबूत किया जाएगा। कोर्स को तेजी से सीखने, शिक्षार्थी सहायता विश्लेषण, लिविंग लैब्स आधारित क्षमता-निर्माण और डिजिटल स्किल के साथ ही एआई आधारित इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा। कार्यशाला में जीआईजेड, केपीएमजी और स्वयं कार्यकारी परिषद के साथ ही बीएचयू के संकाय के प्रोफेसरों व तकनीकी टीमों के विशेषज्ञों द्वारा विचार-विमर्श किया जा रहा है। कार्यशाला में प्रबंधन अध्ययन संस्थान के संकाय प्रमुख प्रो. एस के दुबे, डॉ. पंकज सिंह, डॉ. अनिंदिता चक्रवर्ती, डॉ. नेहा पांडेय आदि मौजूद रहे।