गंगा तट से ददरी मेला तक बनेगा धार्मिक-सांस्कृतिक गलियारा
कॉरिडोर की सबसे खास कड़ी इसे गंगा तट और ददरी मेला क्षेत्र से जोड़ना है। गंगा तट तक पहुंचने के लिए जगरनाथ चौधरी की मूर्ति से जाने वाले मार्ग के चौड़ीकरण और पिचिंग का काम पूरा किया जा चुका है। धरीक्षन बाबा के सामने पुलिया भी बनकर तैयार हो गई है। अब इसे गंगा मार्ग से जोड़ने का कार्य किया जाएगा। इसके बाद भृगु मंदिर, गंगा तट और ददरी मेला क्षेत्र एक ही कॉरिडोर से जुड़ जाएंगे। मंदिर परिसर का विस्तार, सुंदरीकरण, चौड़े रास्ते, व्यवस्थित गलियारे और श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
कार्तिक पूर्णिमा और ददरी मेले में उमड़ती है लाखों की भीड़
महर्षि भृगु मंदिर में कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान और पूजन के लिए करीब पांच लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचते हैं। वहीं ऐतिहासिक ददरी मेले में 50 लाख से अधिक लोगों की भीड़ उमड़ती है। ऐसे में कॉरिडोर बनने के बाद श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलने के साथ बलिया के धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को भी नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
भृगु कॉरिडोर का 13 सितंबर को पर्यटन मंत्री करेंगे भूमि पूजन
जनपदवासियों का बहुप्रतीक्षित इंतजार अब खत्म होने जा रहा है। शहर के महर्षि भृगु मंदिर परिसर में रविवार को बहुप्रतीक्षित भृगु कॉरिडोर का शिलान्यास होगा। पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह सुबह 11 बजे मंदिर परिसर में विधि-विधान से भूमि पूजन कर परियोजना की शुरुआत करेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मार्च में इस महत्वाकांक्षी परियोजना को मंजूरी दी थी।
परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के अनुसार भृगु मंदिर के संपूर्ण विकास एवं निर्माण पर करीब 100 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। परियोजना को दो चरणों में पूरा किया जाना है। प्रथम चरण के लिए 50 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसमें मुख्य प्रवेश द्वार समेत अन्य विकास एवं निर्माण कार्यों पर 10 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जाएंगे। इसके बाद दूसरे चरण के कार्य भी जल्द शुरू किए जाएंगे।
कॉरिडोर के निर्माण से मंदिर परिसर का विस्तार और व्यापक स्तर पर सौंदर्यीकरण किया जाएगा। भृगु कॉरिडोर के निर्माण को बलिया की धार्मिक और पर्यटन पहचान को नई दिशा देने वाली महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है। इसके पूरा होने के बाद महर्षि भृगु मंदिर को धार्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की उम्मीद है।