ब्लॉकबस्टर भोजपुरी फिल्म ‘निरहुआ रिक्शावाला’ से खासी पहचान पाने वाली लकी चार्म पाखी हेगड़े चाहती हैं कि भोजपुरी फिल्मों की दशा सुधारने के लिए डब्ड फिल्मों की स्क्रिप्ट की बजाय रियल स्टोरी पर काम किया जाए।
इसके लिए जरूरी यह भी है कि भोजपुरी सिनेमा में आने वाले नए कलाकार भी बेहतर स्क्रिप्ट का चुनाव करके ही फिल्में करें। अमर उजाला के चांदपुर कार्यालय में एक खास मुलाकात में पाखी हेगड़े ने अपने मन की बातों का साझा किया।
आप मूलत: कर्नाटक से हैं फिर भी भोजपुरी फिल्मों में क्यों आ गईं?
मैं कर्नाटक से जरूर हूं लेकिन मेरी शिक्षा महाराष्ट्र से हुई है। करियर तो मैंने दूरदर्शन से शुरू किया था बॉलीवुड फिल्मों के भी ऑफर थे लेकिन मेरा मन नहीं था। परिवार का दबाव था कि जो भी करना बेहतर करना। भोजपुरी फिल्मों से शुरूआत हुई और उसने मुझे जो मुकाम दिया है, वह आज भी कायम है। लोगों को भोजपुरी बोलने में शर्म आती है लेकिन मुझे गर्व होता है कि मैं भोजपुरी फिल्मों की स्टार हूं।
भोजपुरी फिल्म उद्योग की हालत खस्ता क्यों है?
भोजपुरी फिल्मों को सरकार से सहायता नहीं मिलती है। मल्टीप्लेक्स में भोजपुरी फिल्में रिलीज नहीं होती हैं जबकि महाराष्ट्र में मराठी सिनेमा को राज्य सरकार प्रमोट करती है। भोजपुरी सिनेमा ने कई अभिनेताओं को नाम दिया, शोहरत दिया लेकिन उन्होंने भोजपुरी के लिए कुछ नहीं किया।
भोजपुरी के उत्थान के लिए सभी को एकजुट होना पड़ेगा। बेसलेस फिल्मों से ऊपर उठना होगा और रियल स्क्रिप्ट व सिचुएशन पर काम करना होगा तभी भोजपुरी फिल्मों का भला होगा।
अगले कोई खास प्रोजेक्ट, जिन पर आप काम कर रही हैं?
वर्तमान में मैं महिला केंद्रित फिल्में ही कर रही हूं। कामर्शियल सिनेमा तो नहीं कर रही लेकिन अगले पांच महीने में मेरी द ब्लैक ट्रूथ मूवी आने वाली है। इसकी कहानी झारखंड व बिहार में डायन प्रथा पर आधारित है। मलंग के लिए भी बातचीत चल रही है और संभावना है कि मैं इसमें काम करूं।
बनारस आकर कैसा लगा?
बनारस बार-बार आने की इच्छा होती है। संभावना है कि अगली फिल्म की शूटिंग भी बनारस में ही हो। बाबा विश्वनाथ का बहुत ही दिव्य दर्शन मिला। इसके पहले निरहुआ रिक्शा वाला फिल्म के प्रमोशन के दौरान दर्शन किया था। उसका मुझे बहुत लाभ हुआ था।