पूर्व सांसद जवाहर जायसवाल के भाई और शराब और होटल कारोबारी हीरालाल जायसवाल ने वरुणा की तलहटी और नगर निगम की जमीन को पाटने के साथ-साथ वर्षों पुराने 15 फुट के नाले को भी पाट दिया। इस नाले से पूरी बस्ती का गंदा और बेकार पानी वरुणा नदी में जाता था।
करीब दो महीने से नाले के करीब पचास फुट ऊपर तक मिट्टी पाटे जाने से करीब दो सौ परिवारों के घरों की जल निकासी रुक गई है। पानी मोहल्ले में ही लगने लगा है और गंदगी फैल रही है। आए दिन बच्चे बीमार हो रहे हैं।
जिला मुख्यालय से करीब एक किलोमीटर दूर इस इलाके की समस्या की ओर से किसी का ध्यान नहीं है। स्थानीय लोग इस संबंध में कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण, डीएम योगेश्वर राम मिश्रा, वीडीए उपाध्यक्ष, नगर आयुक्त, एसएसपी, पीएम के संसदीय कार्यालय समेत अधिकारियों से शिकायत कर चुके है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात में पानी निकासी न होने से घरों में गंदा पानी भरेगा। इसे लोग बस्ती खाली कराने की साजिश मान रहे हैं। करीब दो महीने पहले रात भर डंपरों की आवाजाही शुरू होने पर कुछ लोगों ने इसे रोकने की कोशिश की।
वे मिट्टी भराई वाली जगह पर मना करने गए तो उन्हें बंदूकधारियों ने धमका दिया और चुप रहने की सलाह दी। इस पर लोगों ने पुलिस और प्रशासन से शिकायत की लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई।
अमर उजाला में लगातार खबर छपने के बाद प्रशासन ने जब नगर निगम की जमीन से हीरालाल का नाम हटाकर उसे बंजर के रूप में दर्ज कर दिया तो स्थानीय लोगों में न्याय की उम्मीद जग गई है।
इस बस्ती की प्रेमा देवी, दीनाकांत, विनोद कुमार, आशा देवी, सुशील कुमार, अजय कुमार, संजय कुमार, राजीव, विजय आदि लोगों का कहना है कि अब शायद प्रशासन नाले से कब्जा हटवा दे।