प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि संत रैदास जी की शिक्षाओं और उनके आदर्शों पर चलकर ही हम उनके सपनों के गांव बेगमपुरा को हकीकत में उतार सकते हैं। संत रैदास पढ़ने से ज्यादा जीवन में ढालने और उस पर चलने का नाम हैं। जब भी मैं संत रैदास को पढ़ता हूं, मुझे उनकी वाणी से आत्म परिष्कार मिलता है। उनकी रचनाएं न सिर्फ एक काल विशेष का अतिक्रमण करती हैं बल्कि आने वाले हजार - हजार वर्षों तक पीढ़ियों को मार्गदर्शन करती रहेंगी। इ
संत रविदास की जयंती पर दी रविदास स्मारक सोसाइटी काशी की ओर से रविदास मंदिर राजघाट में विशाल भंडारे, भजन संकीर्तन और गोष्ठी का आयोजन हुआ। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने मंदिर के संस्थापक बाबू जगजीवन राम को पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद गुरु रविदास जी की विधिवत पूजा अर्चना की।
मीरा कुमार ने कहा गुरु रविदास जी ने कुरीतियों के कैदखाने को ढहाया और उजास दिखाया। उनका जीवन शीशे की तरह पारदर्शी है। इस दौरान काशी के कवि साहित्यकारों ने मंदिर में माथा टेका। पुजारी रामविलास दास ने गुरु जी के पद रविदास जु है बेगमपुरा ऊह पूरन सुख धाम... का संगीतमय पाठ किया। कवि डॉ. जय शंकर जय ने अपनी पुस्तक संत रविदास जीवन परिचय एवं सामाजिक सरोकार भेंट की। सोसाइटी के अध्यक्ष मंजुल कुमार, सचिव रतनलाल भगत, डॉ अंशुल, अभिजीत, शालिनी यादव आदि मौजूद रहीं। संयोजन एवं संचालन सतीश कुमार उर्फ फगुनी राम ने किया।