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Varanasi: ‘खेले मसाने में होरी‘....बीएचयू भारत अध्ययन केंद्र में पंडित छन्नूलाल मिश्र के गीतों पर झूमे लोग

Wed, 03 Aug 2022 10:16 AM IST
वाराणसी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

बीएचयू के भारत अध्ययन केंद्र में भारत की कथा परंपरा विषय पर दो दिवसीय संगोष्ठी के अंतिम दिन पद्मविभूषण छन्नूलाल मिश्र ने कजरी, निर्गुण और सोहर की प्रस्तुति से सभी का दिल जीत लिया।
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बीएचयू के भारत अध्ययन केंद्र में कार्यक्रम - फोटो : अमर उजाला
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बीएचयू के भारत अध्ययन केंद्र में भारत की कथा परंपरा विषय पर दो दिवसीय संगोष्ठी के अंतिम दिन पद्मविभूषण छन्नूलाल मिश्र ने कजरी, निर्गुण और सोहर की प्रस्तुति से सभी का दिल जीत लिया। जैसे ही भैया मोरे आये अनवईया सावनवा में ना जाइब ननदी गाना शुरू किया वहां मौजूद लोग झूम उठे। पद्मश्री गीता चंद्रन ने भी गीत और भावपूर्ण नृत्य की प्रस्तुति की।

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बतौर मुख्य अतिथि पं. छन्नूलाल मिश्र ने माहेश्वर सूत्रों से संगीत के उद्भव की व्याख्या कर कजरी, निर्गुण व सोहर के गीतों के माध्यम से भारत के विभिन्न गीतों में कथा परंपरा की झलक दी। उन्होंने सुप्रसिद्ध गीत ‘खेले मसाने में होरी‘ गाकर सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा।

नृत्यांगना पद्मश्री गीता चंद्रन ने सुमधुर गीत व भावपूर्ण नृत्य मुद्राओं के माध्यम से स्पष्ट किया कि कैसे बिना कथा साहित्य के नाट्य या नृत्य अधूरा होता है। भारत के सांस्कृतिक नृत्यों में संगीत और कथा के समायोजन के बारे में विभिन्न मुद्राओं तथा विविध दक्षिण भारतीय गीतों के माध्यम से प्रस्तुति की।
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शुभारंभ लोक गायिका मालिनी अवस्थी, छन्नूलाल मिश्र ने किया। इस दौरान डा. मौली कौशल, डॉ. धर्मेंद्र पारे और डॉ. स्वर्ण अनिल ने अपनी बातों को प्रमुखता से रखा। कार्यक्रम में डॉ. समीर कुमार पाठक, प्रो. जम्पा सामतेन, प्रो. फूलचंद जैन, प्रो. चंद्रकला त्रिपाठी, डॉ. सच्चिदानंद जोशी मौजूद रहे।

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