इस दौरान मोर्चा के अन्य पदाधिकारियों ने बताया कि छापेमारी को केंद्र की बीजेपी सरकार द्वारा 2024 के चुनाव से जोड़कर देखा जा सकता है। राजनीतिक विरोधियों की आवाज को बल पूर्वक दबाने का यह प्रयास है। केवल एनआईए ही नहीं बल्कि ईडी और सीबाआई जैसी तमाम एजेंसियां सरकार की बी टीम बनकर केवल विरोधियों को दबाने का काम कर रही है।