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बनारस क्लब : कमिश्नर-डीएम लखनऊ तलब

Fri, 09 Dec 2016 02:19 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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करोड़ों की सरकारी जमीन पर पट्टा खत्म होने के बावजूद उस पर संचालित बनारस क्लब के मामले में विधान परिषद की समिति ने कमिश्नर और जिलाधिकारी को लखनऊ तलब किया है। सपा एमएलसी शतरुद्र प्रकाश द्वारा बनारस क्लब से जुड़ी अनियमितताओं के संबंध में की गई शिकायत पर गुरुवार को लखनऊ में पेश हुए वीडीए सचिव एमपी सिंह और एडीएम प्रशासन मुनींद्रनाथ उपाध्याय की तैयारी को नाकाफी बताते हुए विधान परिषद समिति के सभापति अशोक  बाजपेई ने बैरंग लौटा दिया। कहा कि दिसंबर के तीसरे हफ्ते में क्लब की लीज सहित इससे जुड़े अन्य सभी विवरण, दस्तावेज और पूरी तैयारी के साथ कमिश्नर और डीएम समिति के सामने पेश हों।
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एमएलसी शतरुद्र प्रकाश ने विधान परिषद की विकास प्राधिकरणों, आवास विकास परिषद, जिला पंचायतों एवं नगर निगमों में व्याप्त अनियमितताओं की जांच करने के लिए बनी समिति के सभापति अशोक बाजपेई से शिकायत की थी कि बनारस क्लब बगैर विधिक अधिकार के नजूल की जमीन पर काबिज है। क्लब को 1925 में 90 साल के पट्टे पर ढाई एकड़ से ज्यादा जमीन दी गई थी। शर्त थी कि हर 30 साल पर पट्टे का नवीनीकरण कराया जाएगा। 1955 में पट्टे का नवीनीकरण नहीं कराया गया, जबकि 1985 में स्थानीय स्तर पर बैक डेट में इसकी औपचारिकता पूरी कराई गई और शासन से स्वीकृति नहीं ली गई। 2015 में पट्टे की मियाद खत्म होने के बाद भी जमीन खाली नहीं कराई गई। कानूनन अब पट्टे का नवीनीकरण नहीं हो सकता और न नया पट्टा दिया जा सकता है। इस दौरान क्लब ने नजूल भूमि पर अवैध एवं गैरकानूनी तरीके से निर्माण कार्य कराया है। वीडीए ने इसे अवैध करार देकर 2010 में ध्वस्तीकरण का आदेश दिया था। बनारस क्लब ने वीडीए चेयरमैन के यहां इस आदेश के खिलाफ अपील की तो उन्होंने सुनवाई के लिए उपाध्यक्ष को मामला सौंप दिया। मगर अब तक मामला ठंडे बस्ते में है। इसके साथ ही वीडीए द्वारा निर्धारित की गई शर्तों का भी क्लब ने उल्लंघन किया।


शतरुद्र प्रकाश का समिति के सभापति से अनुरोध था कि जिस नजूल की जमीन पर एक प्राइवेट क्लब संचालित हो रहा है, उसे सरकार अपने कब्जे में ले। कचहरी परिसर विस्तार सहित अन्य जनोपयोगी कार्यों में उक्त जमीन का उपयोग हो। वाराणसी महायोजना के अनुसार जहां बनारस क्लब संचालित है, वहां की जमीन किसी व्यक्ति या क्लब को न देकर राजकीय और अर्ध राजकीय कार्यालय के उपयोग में ही ली जा सकती है। जमीन पर हुआ अवैध निर्माण ध्वस्त कराया जाए। इस संबंध में सभापति अशोक बाजपेई से फोन पर हुई बातचीत में अमर उजाला को बताया कि अगली सुनवाई में कमिश्नर और डीएम वाराणसी को पूरी तैयारी के साथ आने का निर्देश दिया गया है। बैठक की तिथि एक-दो दिन में तय कर दी जाएगी। गुरुवार को जो अधिकारी आए थे, वे पूरी तैयारी के साथ नहीं आए थे, इसलिए उन्हें वापस कर दिया गया। मामले की सुनवाई तेजी से की जाएगी। तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर जनहित में निर्णय लिया जाएगा।
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एमएलसी शतरुद्र प्रकाश ने विधान परिषद समिति को दिए गए प्रत्यावेदन में खुलासा किया है कि बनारस क्लब को जिस नजूल की जमीन पर पट्टा मिला हुआ था, उसके संबंध में जिला जज से परामर्श किया जाना चाहिए था। उनकी जानकारी में आया है कि इस संबंध में जिला जज से कोई परामर्श नहीं लिया गया। शतरुद्र प्रकाश की दलील है कि नजूल मैनुअल के अनुसार प्रदेश में किसी भी जनपद में कचहरी के समीप स्थित नजूल भूमि का पट्टा जिला जज के परामर्श के बगैर नहीं किया जा सकता है। ऐसे में आज की अवस्था में बिना किसी वैधानिक प्राधिकार के अवैध कब्जेदार के रूप में बनारस क्लब नजूल की जमीन पर अनधिकृत रूप से संचालित है।
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