प्रशिक्षुओं को शहनाई की हर एक बारीकी सिखाई और बताई जाएगी। फतेह अली खां ने बताया कि उनको सामूहिक राग, राग की जाति, तान निकालने का तरीका, आलापचारी, जोड़, झाला, बोल, मुर्की, खनक आदि के अलावा ठुमरी, चैती, कजरी, होरी आदि की धुन बजाना भी बताया जाएगा।
काशी की ठुमरी पर बनी थी, दिल का खिलौना टूट गया...
उस्ताद बिस्मिल्लाह खां को प्रसिद्धि फिल्म गूंज उठी शहनाई... से मिली थी। फतेह अली खां ने बताया कि दादा जी ने इस फिल्म में शहनाई बजाई थी। इस फिल्म के गीत दिल का खिलौना टूट गया... काशी की ठुमरी की धुन से ही ली गई थी। ठुमरी के बोल थे- बरसे बदरिया सावन की...। इसी पर इस गीत को पिरोया गया था। उन्होंने बताया कि शहनाई ही ऐसा वाद्य है जिसमें सारंगी, हारमोनियम, वायलिन, सितार का मिश्रण होता है।
सुनें इनकी
उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की शहर में शहनाई को संजोए रखने की जरूरत है। उन्होंने शहनाई को दुनिया में फैलाया। इसे देखते हुए यहां कार्यशाला शुरू की गई है। आगे भी ऐसी कार्यशालाएं आयोजित कराई जाएंगी। - शोभित कुमार नाहर, निदेशक, उत्तर प्रदेश संगीत नाटक एकेडमी