फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गुरु-शिष्य परंपरा की शुरुआत: बिस्मिल्लाह खां की बंदिशों को शहनाई पर साधेंगे नवांकुर, 15 दिन तक चलेगी कार्यशाला

Sun, 16 Jun 2024 06:19 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी

सार

Varanasi News: कार्यशाला में विदेश से भी कुछ लोगों ने ऑनलाइन क्लास के लिए पंजीकरण कराया है। उस्ताद फतेह अली खां ने बताया कि शहनाई को भी विश्वविद्यालयों में विषय के रूप में शामिल करने की मांग की ताकि इसका सरंक्षण हो सके।
विज्ञापन
कोदई चौकी में शहनाई की कार्यशाला में प्रशिक्षण देते फतेह अली खां। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

शहनाई के बादशाह उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के शहर में पहली बार शहनाई की कार्यशाला शुरू हो रही है। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक एकेडमी की ओर से आयोजित 15 दिवसीय कार्यशाला में नवांकुरों को उस्ताद की बंदिशें सिखाई जाएंगी। उस्ताद के पोते उस्ताद फतेह अली खां नवांकुरों को शहनाई पर रागों को साधने की कला सिखाएंगे। शहनाई की खूबियों से रूबरू कराएंगे।

विज्ञापन


उत्तर प्रदेश संगीत नाटक एकेडमी की ओर से प्रदेशभर में मई से ही कार्यशालाएं संचालित हो रही हैं। इसी क्रम में बनारस में उपशास्त्रीय संगीत की भेलूपुर स्थित शिल्पायन संस्था परिसर में और कोदई चौकी स्थित उस्ताद फतेह अली खां के आवास पर शहनाई की कार्यशाला शनिवार को शुरू हो गई। 

पहले दिन उस्ताद फतेह अली खां ने नवांकुरों को शहनाई की बेसिक चीजों से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि पहली बार प्रदेश सरकार की ओर से इस तरह की कार्यशाला हो रही है। अभी 15 बच्चों और युवाओं ने पंजीकरण करवाया है। दो मेरठ और पांच पुणे से प्रतिभागी सीखने आ रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

राग की जाति और जानेंगे बाट व तान

प्रशिक्षुओं को शहनाई की हर एक बारीकी सिखाई और बताई जाएगी। फतेह अली खां ने बताया कि उनको सामूहिक राग, राग की जाति, तान निकालने का तरीका, आलापचारी, जोड़, झाला, बोल, मुर्की, खनक आदि के अलावा ठुमरी, चैती, कजरी, होरी आदि की धुन बजाना भी बताया जाएगा।

काशी की ठुमरी पर बनी थी, दिल का खिलौना टूट गया...
उस्ताद बिस्मिल्लाह खां को प्रसिद्धि फिल्म गूंज उठी शहनाई... से मिली थी। फतेह अली खां ने बताया कि दादा जी ने इस फिल्म में शहनाई बजाई थी। इस फिल्म के गीत दिल का खिलौना टूट गया... काशी की ठुमरी की धुन से ही ली गई थी। ठुमरी के बोल थे- बरसे बदरिया सावन की...। इसी पर इस गीत को पिरोया गया था। उन्होंने बताया कि शहनाई ही ऐसा वाद्य है जिसमें सारंगी, हारमोनियम, वायलिन, सितार का मिश्रण होता है।

सुनें इनकी
उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की शहर में शहनाई को संजोए रखने की जरूरत है। उन्होंने शहनाई को दुनिया में फैलाया। इसे देखते हुए यहां कार्यशाला शुरू की गई है। आगे भी ऐसी कार्यशालाएं आयोजित कराई जाएंगी। - शोभित कुमार नाहर, निदेशक, उत्तर प्रदेश संगीत नाटक एकेडमी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें