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गंगा पुष्कर कुंभ की शुरूआत: दिखेगी उत्तर और दक्षिण की संस्कृति, जानें- क्या है पार्थिव शिवलिंग की मान्यता ?

Sat, 22 Apr 2023 11:53 AM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

गंगा पुष्कर कुंभ 22 अप्रैल से शुरू होकर तीन मई तक चलेगा। इस दौरान दक्षिण भारतीय समाज के लोग पूजा अर्चना, पूर्वजों का तर्पण, स्मृति लिंग स्थापित करने और पार्थिव शिवलिंग की पूजा के लिए काशी पहुंचने लगे हैं। पिछले तीन दिनों से दक्षिण भारत के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला लगातार जारी है। मेले में अस्सी, केदारघाट, शंकराचार्य घाट, मानसरोवर, चौकी व राजघाट पर सबसे अधिक भीड़ होगी। आयोजन में सबसे अधिक श्रद्धालु आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से पहुंच रहे हैं।
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वाराणसी घाट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तरवाहिनी गंगा का किनारा फिर से उत्तर और दक्षिण की संस्कृति के मिलन का साक्षी बनेगा। बृहस्पति के राशि परिवर्तन के साथ ही 12 साल बाद गंगा के तट पर गंगा पुष्कर कुंभ शनिवार से आरंभ हो गया है। अस्सी से लेकर राजघाट के बीच सभी 84 घाटों पर दक्षिण भारतीय श्रद्धालु अपने पूर्वजों के निमित्त, पाप से मुक्ति व सौभाग्य की कामना से अनुष्ठान कर रहे हैं। 

गंगा पुष्कर कुंभ 22 अप्रैल से शुरू होकर तीन मई तक चलेगा। इस दौरान दक्षिण भारतीय समाज के लोग पूजा अर्चना, पूर्वजों का तर्पण, स्मृति लिंग स्थापित करने और पार्थिव शिवलिंग की पूजा के लिए काशी पहुंचने लगे हैं। पिछले तीन दिनों से दक्षिण भारत के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला लगातार जारी है। मेले में अस्सी, केदारघाट, शंकराचार्य घाट, मानसरोवर, चौकी व राजघाट पर सबसे अधिक भीड़ होगी। आयोजन में सबसे अधिक श्रद्धालु आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से पहुंच रहे हैं।

आंध्रा आश्रम के ट्रस्टी वीवी सुंदर शास्त्री ने बताया कि गंगा के हर घाट पर श्रद्धालुओं द्वारा पितरों के निमित्त तर्पण व अनुष्ठान होंगे। इस बार गंगा पुष्कर कुंभ गंगा नदी के किनारे लग रहा है। ऐसे में गंगोत्री से गंगा सागर तक जिन-जिन शहरों में गंगा हैं वहां पर श्रद्धालु पहुंचेंगे। प्रयागराज आने वाले श्रद्धालु काशी भी आएंगे। इसके पूर्व 2011 में गंगा पुष्कर कुंभ हुआ था। इस बार 10 से 12 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आने की संभावना है।

 

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गंगा - फोटो : अमर उजाला
ब्रह्म मुहूर्त से आरंभ हुआ गंगा पुष्कर कुंभ

गंगा पुष्कर कुंभ का शुभ मुहूर्त 22 अप्रैल को भोर में 5:15 बजे से आरंभ हो गया है। श्रद्धालु गंगा में स्नान करने के बाद तर्पण व पिंडदान कर रहे हैं। इसके बाद काशी विश्वनाथ मंदिर, मां अन्नपूर्णा, कालभैरव, बिंदुमाधव का दर्शन पूजन करके पंरपरा को पूर्ण करेंगे। गंगा पुष्कर में पंचगंगा घाट स्थित बिंदु माधव के दर्शन पूजन की मान्यता है। यहां पर सबसे अधिक श्रद्धालुओं की भीड़ होगी।

घाटों पर बनाए जा रहे पार्थिव शिवलिंग

अस्सी से लेकर हनुमान घाट के बीच श्रद्धालुओं के पुरोहित द्वारा जगह-जगह पार्थिव शिवलिंग बनाकर रुद्राभिषेक व पूजन आरंभ हो चुका है। दक्षिण भारत के श्रद्धालु अन्नदान भी करेंगे। मान्यता के अनुसार, पुष्कर नाम के एक भक्त ने भगवान शिव से पवित्र नदियों को शुद्ध करने का आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने 12 पवित्र नदियों में प्रवेश किया। इन नदियों में गंगा, नर्मदा, सरस्वती, यमुना, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, भीमा, ताप्ती, तुंगभद्रा, सिंधु और प्राणिता शामिल हैं।

 

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Ganga - फोटो : iStock

गुंटूर मठ में है 50 हजार से ज्यादा लोगों के भोजन का इंतजाम

क्षेमेश्वर घाट पर स्थित गुंटूर मठ में 50 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं के लिए भोजन का इंतजाम किया गया है। इसके अलावा आंध्रा आश्रम में भी श्रद्धालुओं के लिए इंतजाम किए गए हैं। गंगा पुष्कर कुंभ में शामिल होने आ रहे श्रद्धालुओं के लिए जिला प्रशासन व मंदिर की ओर से खास इंतजाम किए गए हैं। अस्सी घाट से राजघाट तक चेंजिंग रूम लगाए गए हैं। शहर के होटल धर्मशाला की सूची भी सार्वजनिक की गई है जिससे कि श्रद्धालुओं को परेशानी न हो।

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