ब्रह्म मुहूर्त से आरंभ हुआ गंगा पुष्कर कुंभ
गंगा पुष्कर कुंभ का शुभ मुहूर्त 22 अप्रैल को भोर में 5:15 बजे से आरंभ हो गया है। श्रद्धालु गंगा में स्नान करने के बाद तर्पण व पिंडदान कर रहे हैं। इसके बाद काशी विश्वनाथ मंदिर, मां अन्नपूर्णा, कालभैरव, बिंदुमाधव का दर्शन पूजन करके पंरपरा को पूर्ण करेंगे। गंगा पुष्कर में पंचगंगा घाट स्थित बिंदु माधव के दर्शन पूजन की मान्यता है। यहां पर सबसे अधिक श्रद्धालुओं की भीड़ होगी।
घाटों पर बनाए जा रहे पार्थिव शिवलिंग
अस्सी से लेकर हनुमान घाट के बीच श्रद्धालुओं के पुरोहित द्वारा जगह-जगह पार्थिव शिवलिंग बनाकर रुद्राभिषेक व पूजन आरंभ हो चुका है। दक्षिण भारत के श्रद्धालु अन्नदान भी करेंगे। मान्यता के अनुसार, पुष्कर नाम के एक भक्त ने भगवान शिव से पवित्र नदियों को शुद्ध करने का आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने 12 पवित्र नदियों में प्रवेश किया। इन नदियों में गंगा, नर्मदा, सरस्वती, यमुना, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, भीमा, ताप्ती, तुंगभद्रा, सिंधु और प्राणिता शामिल हैं।
गुंटूर मठ में है 50 हजार से ज्यादा लोगों के भोजन का इंतजाम
क्षेमेश्वर घाट पर स्थित गुंटूर मठ में 50 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं के लिए भोजन का इंतजाम किया गया है। इसके अलावा आंध्रा आश्रम में भी श्रद्धालुओं के लिए इंतजाम किए गए हैं। गंगा पुष्कर कुंभ में शामिल होने आ रहे श्रद्धालुओं के लिए जिला प्रशासन व मंदिर की ओर से खास इंतजाम किए गए हैं। अस्सी घाट से राजघाट तक चेंजिंग रूम लगाए गए हैं। शहर के होटल धर्मशाला की सूची भी सार्वजनिक की गई है जिससे कि श्रद्धालुओं को परेशानी न हो।