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गए थे नोट बदलने, मिलीं लाठियां

Sat, 12 Nov 2016 02:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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पुराने नोट जमा करने और बदलने के लिए दिन भर जद्दोजहद हुई।
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दो दिन से पुराने नोट जमा करने और बदलने के लिए घंटों कतार में खड़े होने वाले लोगों का सब्र टूटने लगा है। जगह-जगह हो रहे हंगामे को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ रहा है। शुक्रवार को रामनगर किला रोड, बीएचयू शॉपिंग सेंटर, मिर्जा मुराद, लोहता और कई अन्य स्थानों पर भीड़ की बैंक कर्मियों और पुलिस से नोकझोंक हुई। गुस्साए लोगों ने हंगामा भी किया।


रामनगर के किला रोड स्थित बैंक आफ  बड़ौदा पर नोट बदलने के लिए लाइन में लगे लोग धक्कामुक्की करने लगे। स्थिति को सामान्य करने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। इससे अफरा-तफरी का माहौल रहा। यहां के अधिकांश बैंक मे बुजुर्गों के लिए काउंटर नहीं होने से परेशानी उठानी पड़ रही है। उधर, बीएचयू के हास्टल रोड स्थित शॉपिंग सेंटर के एसबीआई शाखा में सुबह से ही छात्र-छात्राओं, कर्मचारियों की लंबी लाइन लगी थी। लाइन में आगे लगने को लेकर कुछ छात्र भिड़ गए। सुरक्षाकर्मियाें के हस्तक्षेप पर छात्रों ने तोड़फोड़ की। बैंक के गेट का शीशा तोड़ दिया। इससे कुछ देर तक अफरा-तफरी रही। जब तक प्रॉक्टोरियल बोर्ड की टीम पहुंचती, छात्र निकल चुके थे।
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रोहनिया क्षेत्र के जगतपुर और गंगापुर में सुबह से लगी लंबी कतारों में धक्का-मुक्की के बाद 4000 रुपये के नोट बदलने में लोगों को कामयाबी मिली। मिर्जामुराद में एसबीआई की शाखा में लंबी कतार लगने से हाईवे की सर्विस रोड पर आवागमन बाधित रहा। कई बार हंगामे की स्थित उत्पन्न हुई। पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। सेवापुरी के हाथी बाजार स्थित एसबीआई की शाखा में दोपहर में रुपये खत्म हो जाने पर लोगों का धैर्य टूट गया और हंगामा शुरू कर दिया। बड़ागांव क्षेत्र के भी कई बैंकों में दो बजे रुपये खत्म हो जाने पर नोट नहीं बदले जा सके। दानगंज के यूनियन बैंक, काशी गोमती संयुक्त ग्रामीण की बेला और नियारडीह शाखा में भी रुपये न होने की बात कह कर नोट बदलने से इनकार कर दिया गया। इसके चलते बैंकों में हंगामा होता रहा।


 लोहता के बैंक ऑफ बड़ौदा में शाम छह बजे कर्मचारियों ने नोट बदलने से मना कर दिया, जिससे हंगामा होने लगा। पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। इसके बाद बैंक बंद कर दिया गया। हरहुआ के चक्का गांव स्थित यूनियन बैक में लोगों के बीच मारपीट हो गई। पुलिस के पहुंचने पर मामला शांत हुआ। पिंडरा, सिंधोरा, फूलपुर और मंगारी में भी हंगामा हुआ।


शहर और ग्रामीण क्षेत्र के ज्यादातर बैंकों के एटीएम शुक्रवार को भी बंद रहे। पूर्व में की गई घोषणा के मद्देनजर लोग एटीएम पर पहुंचे और ताला देखकर वापस लौट आए। जो एटीएम केंद्र खुले थे, उनमें रुपये नहीं थे। एसबीआई, काशी गोमती संयुत ग्रामीण बैंक, यूनियन बैंक, सेंट्रल बैंक आफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक आदि के एटीएम का संचालन नहीं हो सका। इसकी वजह नई करेंसी का न आना और साफ्टवेयर अपडेट न होना रहा। देर शाम तक कुछ एटीएम चालू हो गए थे, जहां पैसा लेने के लिए लाइन लगी रही।
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आठ नवंबर की रात 12 बजे के बाद 500-1000 रुपये के नोट बंद होने के बाद जमा-निकासी और 4000 रुपये तक के पुराने नोट बदलने के लिए लोगों की परेशानी दूसरेे दिन बढ़ गई। शुक्रवार को जहां बैंक दो घंटे देरी से खुले वहीं ज्यादातर एटीएम पर ताले लटके रहे। पुराने नोट बदलने के लिए दिन भर भूखे-प्यासे रहकर बैंकों में धक्के खाने पड़े। इस बीच धन की कमी की वजह से कुछ बैंक शाखाओं पर पुराने नोट बदले ही नहीं जा सके। ग्रामीण क्षेत्र में हालात ज्यादा खराब रहे। बैंक अधिकारियों के मुताबिक एक दो दिन में स्थिति सामान्य हो सकती है। शुक्रवार को बैंक आॅफ बड़ौदा चांदपुर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय के गेट के बाहर महिला और पुरुषों की लंबी लाइन लगी रही। यहां लोग सुबह आठ बजे आ गए लेकिन बैंक 10 बजे खुला। इसके बाद तैयारी की गई और पुलिस की मौजूदगी में दोपहर करीब बारह बजे जैसे ही गेट खुला लोग तेजी से अंदर की तरफ दौड़ पड़े। यूनियन बैंक बौलिया, एसबीआई मुख्य परिसर, इंडस्ट्रियल स्टेट चांदपुर, काशी गोमती संयुत ग्रामीण बैंक लहरतारा, एचडीएफसी बैंक लहरतारा, एक्सिस बैंक नाटी इमली आदि शाखाओं पर पैसा बदलने और जमा करने में लंबी लाइन लगी रही। कहीं-कहीं तो टोकन सिस्टम लागू किया गया था। उधर, ग्रामीण क्षेत्र के डाकघरों में 500-1000 के नोट नहीं जमा किए जा रहे हैं।
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