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पुलिस से बचने का नया तरीका: शहर में मिल रहा है केवल सैंपल, गोदामों से डील हो रहा चीनी मांझा; ऐसे पहुंच रही खेप

Sat, 06 Jan 2024 08:00 PM IST
प्रगति चंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

वाराणसी में पुलिस से बचने के लिए प्रतिबंधित चीनी मांझे की बिक्री दुकानदारों द्वारा नए तरीके से किया जा रहा है। ये दुकानदार चोरी छिपे चीनी मांझे की बिक्री कर रहे हैं। शहर में कई स्थानों पर चीनी मांझे की बिक्री हो रही है। 
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Chinese Manjha - फोटो : Social Media
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विस्तार
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मकर संक्रांति नजदीक आने के साथ ही चीनी मांझे की बिक्री बढ़ने लगी है। प्रतिबंधित चीनी मांझे की बिक्री करने वाले दुकानदारों ने पुलिस से बचने के लिए दुकानदारी का तरीका बदल दिया है। चीनी मांझे के लिए कभी चर्चित रही दालमंडी और हड़हा सराय इलाका अब सन्नाटे में हैं। इन क्षेत्रों से पतंग और चीनी मांझे की दुकान अब घनी आबादी वाली दूसरे क्षेत्रों में चली गई हैं, जबकि गोदाम जिले के बॉर्डर पर बनवाया गया है।

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ट्रांसपोर्ट और निजी बसों के जरिये माल गोदाम तक पहुंच रहा है। दालमंडी के एक दुकानदार ने बताया कि प्रतिबंधित चीनी मांझे की बिक्री कम हो गई है, पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए दुकानदार अब माल नहीं मंगाते हैं। हालांकि कुछ दुकानदार चोरी छिपे चीनी मांझे की बिक्री कर रहे हैं। 

कतुआपुरा, काशीपुरा, लल्लापुरा, औरंगाबाद, चेतगंज, बलुआवीर, खोजवां, पांडेयपुर, रामनगर आदि क्षेत्रों में चीनी मांझे की बिक्री हो रही है। नई दिल्ली, बरेली, आगरा समेत पश्चिमी प्रदेश के अन्य जिलों से चीनी मांझे की खेप वाराणसी पहुंचती है। यहीं से पूर्वांचल और बिहार के कुछ जिलों में चीनी मांझे की बिक्री होती है।

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पहले पैसा, पेपर की पैकिंग में चीनी मांझा

औरंगाबाद के रहने वाले एक व्यापारी ने बताया कि चीनी मांझे की बिक्री का फार्मूला बदल गया है। हर किसी को दुकानदार माल नहीं देते हैं। कोई लड़का यदि दुकान पर जाकर चीनी मांझे की मांग करता है तो उसे डांट कर भगा दिया जाता है। पुराने ग्राहकों को दुकान के अंदर ले जाते हैं और प्लास्टिक के बोरे में रखे चीनी मांझे के सैंपल दिखाते हैं। कहते भी हैं कि पैसा जमा कर दीजिए, माल पते तक पहुंच भी जाएगा।

हजार रुपये प्रति किलो तक बिक रहा चीनी मांझे
पहले देसी मांझे से सस्ता बिकने वाला चीनी मांझे की कीमत प्रतिबंध के बाद बढ़ती गईं। अब एक हजार रुपये प्रति किलो तक चीनी मांझे की कीमत पहुंच गई है। ज्यादा से ज्यादा पतंग की डोर काटने वाले इस मांझे को खरीदने के लिए युवा और किशोर लालायित रहते हैं। जबकि दो साल पूर्व तक यह 400-500 रुपये प्रति किलो में बिकता था। चीनी मांझे मैटेलिक पाउडर, नायलान, लोहे व कांच के चूरे को मिलाकर बनाया जाता है।

क्या कहते हैं अधिकारी
सभी एसीपी और थानाध्यक्षों को चीनी मांझे के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई का निर्देश दिया गया है। इस क्रम में कार्रवाई जारी भी है। -मुथा अशोक जैन, पुलिस आयुक्त
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