फर्जी खाता खोलकर हवाला के जरिए मंगाई गई थी धनराशि, रिपोर्ट दर्ज
- फोटो : demo
यह बैंकों में खास कर कोऑपरेटिव बैंकों में चलने वाले आर्थिक घोटालों के ‘सिस्टम’ को उघाड़ने वाली खबर है। यह सात साल से लड़ रहे एक ऐसे कर्मी की आंशिक जीत की खबर है जो बेगुनाह था और कथित तौर पर हवाला का लाखों रुपये खाने वालों ने उसे ही नौकरी से निकाल दिया।
सात साल से भी अधिक पुराने मनी लांड्रिंग और हवाला के जरिए करोड़ों रुपये बैंकों में रुपये जमा करने और निकालने के मामले में बनारस मर्केंटाइल कोऑपरेटिव बैंक के जीजा सचिव और साला प्रबंधक पर बुधवार को सिगरा थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है।
आरोप है कि दोनों ने मिलीभगत कर यमुना गोविंद भुआड़ के नाम से एक फर्जी बैंक एकाउंट खोला और इसमें 60 लाख रुपये मुंबई से चेक के जरिए जमा किए गए। बताया जाता है कि बैंक के सचिव प्रवीण और प्रबंधक विवेकानंद ने कूटरचना कर फर्जी हस्ताक्षर कर रुपये निकाले हैं। विवेकानंद बैंक के सचिव प्रवीण का साला है।
तीन से चार दिन में इस राशि को अलग-अलग नाम के व्यक्तियों के हस्ताक्षर कर पूरी राशि निकाल ली गई। इसकी शिकायत करने पर बैंक कर्मचारी भेलूपुर निवासी माधव प्रसाद को बैंक से निकाल दिया गया। उनकी नहीं सुनी गई।
सात साल बाद बीते दिनों माधव प्रसाद ने एडीजी जोन से शिकायत की थी। इसके बाद जांच हुई तो पता चला कि काशी विद्यापीठ के सामने स्थित बैंक में 22 दिसंबर, 2010 को यमुना गोविंद भुआड़ के नाम से खाता खोला गया था।
पते के रूप में विष्णुपुर (लोहता) का फर्जी राशनकार्ड लगाया गया था। 24 दिसंबर को एकाउंट में 60 लाख रुपये का मुंबई से फर्जी हवाला का चेक डाला गया। इसके बाद फर्जी नाम व पते भरकर 60 लाख रुपये निकाल लिए गए।