डॉ. रघुनाथ सिंह
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पं. लाल बहादुर शास्त्री जब प्रधानमंत्री हुआ करते थे तब भी डॉ. रघुनाथ सिंह ने मंत्री पद को यह कहते हुए ठुकरा दिया था कि इससे मुझपर क्षेत्रवाद का आरोप लग जाएगा। दशाश्वमेध स्थित अपने आवास पर हर शाम को महामना पं. मदन मोहन मालवीय, डॉ. संपूर्णानंद, पं. कमलापति त्रिपाठी सहित हर वर्गों के विशिष्ट लोगों के साथ आवश्यक मुद्दों पर विचार विमर्श किया करते थे।
उन्होंने अपने जीवन काल में कई पुस्तकें लिखीं थीं। इसमें अंग्रेजी में टुवड्र्स फ्रीडम, बुद्ध कथा, योग वशिष्ठï, आधुनिक राजनीति के कखग, एक कोना चौड़ा, कहां संस्कार, जागृत नेपाल, विश्व के धर्म प्रवर्तक, सर्वधर्म समभाव, लावारिस, दक्षिण पूर्व एशिया, आर्यन और ऑस्ट्रेलिया सहित अनेक पुस्तकें लिखीं।