वाराणसी। कोरोना की दूसरी लहर में बनारसी साड़ी कारोबार की आर्थिक स्थिति को मानों चौपट कर दिया है। अप्रैल में ही लगभग 100 करोड़ का कारोबार प्रभावित हो गया। 50 करोड़ का माल उद्यमियों के कारखाने में ही डंप है। नई दिल्ली, महाराष्ट्र, बंगाल, दक्षिण भारत आदि प्रांतों से ऑर्डर दिनों दिन निरस्त हो रहे हैं। व्यापारियों ने माल लेने से इंकार कर दिया है। उद्यमियों की पूंजी फंस गई। ऑर्डर नहीं मिलने की दशा में हथकरघा और पावरलूम भी ठप हो गए हैं। बुनकरों के समक्ष रोजी रोटी का संकट गहराने लगा है।
उद्यमियों को आस थी कि इस वैवाहिक लग्न में बनारसी साड़ी कारोबार बहुत बेहतर होगा, लेकिन इस बार भी कोरोना के चलते सबकुछ बेजार हो गया। पूंजी का संकट, कारीगरों और कच्चे माल का भुगतान भी करना है। यही हाल रहा तो बनारसी वस्त्र उद्योग इकाइयां बंद करने की नौबत आ जाएगी। बनारसी साड़ी का महीने का 500 करोड़ का कारोबार है। इस उद्योग धंधे में जिले भर के लगभग सात लाख लोग परोक्ष अपरोक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। शहर में लगभग 40 हजार हथकरघा संचालित होते हैं।
सभी उद्यमियों के ऑर्डर कैंसिल हो रहे हैं। 50 करोड़ की बनारसी साड़ी कारखानों में डंप पड़ी है। 100 करोड़ का कारोबार कोरोना की भेंट चढ़ गया।-राजन बहल, महामंत्री, बनारसी वस्त्र उद्योग एसोसिएशन
पूंजी फंस गई है, पिछले ऑर्डर का भुगतान नहीं आ रहा है। नए ऑर्डर का माल व्यापारियों ने लेने से इनकार कर दिया। कई राज्यों में लाकडाउन जैसी स्थिति है। -संजय शाह, बनारसी साड़ी कारोबारी
वैवाहिक लग्न में जो साड़ी कारोबार 500 करोड़ से अधिक का होता था, इस बार शून्य के बराबर है। व्यापारियों के यहां पैसा नहीं है। ऑर्डर निरस्त हो रहे हैं।-अरुण अग्रवाल, बनारसी साड़ी कारोबारी