काशी में होली पर प्रेम-सद्भाव के रंग हुड़दंगियों पर भारी पड़े। जीवन में रंग भरने के लिए लोग सुबह ही उल्लास और उत्साह के साथ निकल पड़े। तरह-तरह के वेश में चेहरे बनाए युवकों की टोलियां निकलीं तो छतों, बारजों से लेकर सड़कों, गलियों और घाटों तक रंगों की बारिश होने लगी। महंगाई को दरकिनार कर होली पर चौतरफा यही आलम था। दूसरी पहर अबीर-गुलाल लगाने और गले मिलने की खुशी हर तरफ छाई रही।
बनारस के हृदयस्थल दशाश्वमेध, गोदौलिया में यह पहला मौका था कि डीजे नहीं लगा। इससे न हुड़दंगियों की भीड़ लगी न तो बवाल हुआ। मदनपुरा में सड़क की दोनों पटरियों पर मुसलमान भाई भी होली के निराले अंदाज को देखने के लिए घरों के बाहर जुटे रहे तो लाल, हरे, नीले, पीले रंगों की बौछार भी होती रही। होली की उमंग में मस्त युवकों के समूह महिलाओं की तरह लंबे-लंबे बाल, लाल-काली चोटियां बनाकर होली के उत्साह को बढ़ा रहे थे। कोई साड़ी पहन कर होली खेलने निकला तो कोई सलवार-सूट में दिखा।
होली की धुन में पुरुषों ने महिलाओं की साड़ियां पहनने में भी संकोच नहीं किया। अस्सी में मुमुक्षु भवन के सामने युवतियां होली के रंग में रंगी नजर आईं तो लंका पर डीजे लगाकर युवकों ने शर्ट उतारकर फिल्मी गीतों पर नृत्य किया। चौक, मैदागिन, लहुराबीर, विशेश्वरगंज, मछोदरी, पीलीकोठी, अर्दलीबाजार, कैंट, पांडेयपुर, सिगरा, महमूरगंज, कमच्छा, सोनारपुरा, अस्सी, लंका में उत्साह के साथ लोग रंग खेलते रहे। होली के हुड़दंग पर पुलिस की भी कड़ी नजर थी। रेवड़ी तालाब में डीजे पर डांस पुलिस ने बंद करा दिया। मुसलिम बहुल मदनपुरा, बजरडीहा, कज्जाकपुरा, बड़ी बाजार, कोयला बाजार में भी सौहार्द से होली खेली गई। गंगा घाटों पर विदेशी युवक-युवतियां भी रंगों की बौछार कर रहे थे।