बीएचयू कृषि फार्म पर भी हो रही काले गेहूं की खेती
बीएचयू कृषि विज्ञान संस्थान के प्रोफेसर पीके सिंह ने बताया कि काले गेहूं में पौष्टिकता अधिक मिलती है। यह बात सही है। इसके अलावा और अन्य खूबियों पर अध्ययन किया जा रहा है। मेरठ और हरियाणा के विश्वविद्यालयों में इस पर शोध भी चल रहा है। बीएचयू कृषि विज्ञान संस्थान के कृषि फार्म पर काले गेहूं की खेती की जा रही है। जिससे उत्पादन क्षमता की सही जानकारी मिल सके।
अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान के नर्सरी में काले गेहूं के बीज पर शोध शुरू
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बाद अब पूर्वांचल के जिलों में भी काले गेहूं की फसल लहलहाएगी। चांदपुर स्थित अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (इरी) के नर्सरी में काले गेहूं के बीज पर शोध शुरू हो गया है। इसके बाद किसानों में इसके बीज का वितरण किया जाएगा। बनारस सहित पूर्वांचल के पर्यावरण के अनुकूल और उत्पादन क्षमता पर काले गेहूं के बीज का शोध किया जा रहा है।
शोध के पहले चरण के लिए चांदपुर स्थित इरी के नर्सरी में 25 हजार वर्ग फीट में काले गेहूं की बुआई की गई है। कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक सामान्य गेहूं के मुकाबले काले गेहूं में 60 प्रतिशत तक आयरन सहित जिंक और ऑक्सीडेंट की मात्रा अधिक पाई जाती है। इसके बुआई का सही समय 15 से 30 नवंबर है। 15 से 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर इसके उत्पादन का अनुमान है।
पंजाब के चंडीगढ़ स्थित नेशनल एग्री फूड बायोटेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट ने नाबी एमजी प्रजाति के काले गेहूं के बीज को विकसित किया है। जिसकी खेती पश्चिमी यूपी के कई जिलों में की जा रही है। अब पूर्वांचल में इसकी खेती के लिए शोध किया जा रहा। - अजय मिश्र, मृदा वैज्ञानिक, इरी