कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा।
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दरअसल, पत्रकार रतन सिंह सोमवार को पूरे दिन जिला मुख्यालय बलिया में रहने के बाद शाम को अपने गांव चले गए। शाम को गांव में ही किसी के यहां बैठने के बाद पैदल ही वापस घर जा रहे थे। तभी घर कुछ लोगों ने उनपर फायर झोंक दिया। ग्रामीणों के अनुसार जान बचाने के लिए रतन ग्राम प्रधान में घर में घुस गए लेकिन हमलावरों ने पीछा नहीं छोड़ा और एक-एक कर तीन गोलियां दाग दी। इससे रतन की घटनास्थल पर ही मौत हो गई।
घटना से गुस्साए ग्रामीणों और पत्रकारों ने मंगलवार को शव को सड़क पर रखकर तीन घंटे तक जाम लगाया। प्रशासन ने पांच लाख की फौरी सहायता और पत्नी को संविदा पर नौकरी देने की घोषणा की है। सीएम की ओर से भी दस लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है। मृतक के पिता विनोद कुमार सिंह की तहरीर पर प्रधान प्रतिनिधि समेत 10 लोगों के विरुद्ध केस दर्ज किया है। छह को गिरफ्तार कर लिया गया है। फेफना थानाध्यक्ष को निलंबित किया जा चुका है।
पत्रकार रतन सिंह के पिता विनोद सिंह।
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मृतक के पिता ने आरोप लगाया है कि मेरे पुत्र रतन सिंह को साजिश के तहत मेरे गांव के ही सोनू सिंह पुत्र स्व. विश्वनाथ सिंह घर से बुलाकर ले गए जहां मेरे बेटे को लाठी-डंडा से पीटा गया। इसके बाद तमंचा और रिवाल्वर से सिर में गोली मार दी गई। इस घटना को मेरे भाई मनोज सिंह और कौशल कुमार सिंह ने देखा है।