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यूपी: बलिया में हुई इन घटनाओं से सबक लेते तो नहीं होता ऐसा हत्याकांड

Sun, 18 Oct 2020 11:22 AM IST
गीतार्जुन गौतम अमर उजाला नेटवर्क, बलिया
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Ballia murder case - फोटो : अमर उजाला
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बलिया जिले के बैरिया विकासखंड के दुर्जनपुर गांव में गुरुवार को कोटे की दुकान के लिए हुआ खूनी संघर्ष अनायास, अचानक और परिस्थिति जन्य अपराध नहीं है। ऐसा भी नहीं कि इस प्रकार की घटना जिले में पहली बार हुई है। इसके पहले करीब तीन वर्ष पूर्व रसड़ा तहसील के नफरेपुर गांव में भी कोटा की दुकान के आवंटन को लकर दो पक्ष आमने सामने हुए थे।

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तब भी एक व्यक्ति की मौत हुई थी। लेकिन जिला प्रशासन ने उस घटना से भी सबक नहीं लिया। यही वजह रही कि जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में कोटा की दुकान के आवंटन को लेकर नोंक-झोंक और मारपीट आम बात हो गई। कहीं अधिकारी बंधक बनाए जाने लगे तो कहीं अधिकारियों की मौजूदगी में मारपीट और खूनी संघर्ष का चलन हो गया।


उसी की परिणति दुर्जनपुर में खूनी संघर्ष के रूप में हुई सामने आई। यह प्रशासनिक अधिकारियों की चुप्पी का ही परिणाम रहा कि दुर्जनपुर गांव में उप जिलाधिकारी और क्षेत्राधिकारी की मौजूदगी में दिनदहाड़े दो पक्ष न सिर्फ आमने सामने आए बल्कि पहले जमकर लाठी-डंडे चले और फिर कई राउंड फायरिंग भी हुई, जिसमें एक को अपनी जान गंवानी पड़ी तो दूसरी ओर करीब आधा दर्जन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

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मनियर थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत रिगवन में जिलाधिकारी के निर्देश पर बीते सात सितंबर को कोटे की दुकान कराने गए खण्ड विकास अधिकारी रमेश कुमार यादव को ग्रामीणों द्वारा बंधक बना लिया गया। आरोप था कि बीडीओ मनमाने तरीके से पक्ष विशेष को दुकान आवंटन करने के फिराक में थे।

इसी प्रकार ग्राम पंचायत मानिकपुर में स्वयं सहायता समूह को सरकारी राशन की दुकान आवंटन न करना प्रशासन के लिए उस वक्त गले की फांस बन गई जब तीन बार ग्रामीणों की मीटिंग रखी गई थी और तीनों बार किसी न किसी कारण की वजह से दुकान आवंटन की प्रक्रिया रद्द कर दी गई। आखिरकार 25 सितंबर को ग्रामीणों का जत्था विकास खंड कार्यालय मनियर पर पहुंच गया और विकास खंड कार्यालय का ताला जड़कर धरने पर बैठ गया।

इतना ही नहीं करीब दो सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी दुकान का आवंटन तो नहीं हुआ, अलबत्ता दुकान आवंटन के लिए समूह में मतदान करने गए लोगों के ऊपर 107/ 16 की पुलिस द्वारा कार्यवाही की गई है। ग्रामीणों का आरोप था कि प्रशासन ने सत्ताधारी नेताओं के दबाव में इस प्रकार की कारवाई की।

बेल्थरारोड तहसील क्षेत्र में भी कोटे की दुकान के आवंटन को लेकर अक्सर हर जगह विवाद हो रहे हैं। क्षेत्र के सिकंदरपुरा में कोटे की दुकान के आवंटन में अनियमितता को लेकर ग्रामीण उग्र हो गए और बीते दिनों मुख्य संपूर्ण समाधान दिवस पर सैकड़ों महिलाओं व पुरुषों ने जमकर प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी की। इसके अलावा जिन ग्रामों में आवंटन की प्रक्रिया चल रही है, वहां गवईं राजनीति के चलते अमन-चैन प्रभावित हो रहा है।
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बांसडीह ब्लॉक के छ: गांव बकवा, चांदपुर 55, डुहीमुसी, बिजलीपुर, पिंडहरा, सरांक में नए कोटे की दुकान का आवंटन शासन द्वारा होना निश्चित था, जिसमें चार गांव का कोटे के चयन प्रक्रिया सम्पन्न हो गई है। जबकि बंकवा गांव में समूह की महिलाओं के नाम से चयन होने पर नाराज दूसरा गोल तहसील मुख्यालय पर आकर धरना प्रदर्शन करने के साथ ही उपजिलाधिकारी को पत्रक भी दिया।

वहीं चांदपुर गांव में भी कोटे की दुकान का चयन के समय गांव की महिलाओं ने एडिओएसबी ओमप्रकाश सिंह व सचिव सौरभ को घेर लिया था और जमकर बवाल काटा। इस दौरान उपद्रवियों ने दोनों अधिकारियों के कपड़े फाड़ दिए। इस मामले में मुकदमा भी दर्ज है। इसके अलावा  बिजलीपुर गांव के कोटे के आवंटन पर हाई कोर्ट का स्टे है। जबकि पिण्डहरा गांव में दो बार 5 व 16 सितंबर को बैठक हुई, लेकिन होहल्ला के कारण आवंटन नहीं हो पाया।
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