ईओडब्लू के पीआरओ के अनुसार विवेचना में पाया गया कि जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों ने कोटेदारों और सचिव की मिलीभगत से पत्रावलियों पर भुगतान आर्डर, मास्टर रोल व खाद्यान्न वितरण रजिस्टर में कूटरचना कर केन्द्र सरकार के निर्देशों को गंभीरता से नहीं लेते हुए इस योजना को जबरदस्त चूना लगाया।
श्रमिकों का चयन भी मनमानी तरीके से किया गया और मास्टर रोल में दर्शाये गये श्रमिकों का नाम, पता भी विवेचना में फर्जी पाया गया। इस प्रकरण में मानक के अनुरूप कार्य न कराकर जनपद के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा ग्राम पंचायत विकास अधिकारी, ब्लाक प्रमुख एवं कोटेदारों से मिलीभगत करते हुए सरकारी घन का खाद्यान्न 38,73,940 रुपये का गबन किया था।