सुरेंद्र सिंह के कहने पर उमाशंकर के एसबीआई खाते में अलग-अलग किश्तों में 31 हजार रुपये भेजे। इसके अलावा सुरेंद्र सिंह की पुत्री साक्षी के खाते में आठ हजार रुपये और नकद 35 हजार तथा 3,200 रुपये दिए। इस तरह कुल 77,200 रुपये लिए गए।
करीब दस वर्ष बाद 20 मई 2025 को जब उसने अपनी रकम वापस मांगी तो टालमटोल शुरू कर दी गई। पैसा मांगने पर मारपीट की धमकी भी दी गई। इसके बाद 29 जून 2025 को सुखपुरा थाने में शिकायत की गई। थाने पर दोनों पक्षों की मौजूदगी में सुरेंद्र सिंह ने सहारा में रकम जमा होने के कागजात देने के बजाय रियल सन राइज हॉस्पिटैलिटी लिमिटेड के नाम से 29 अगस्त 2013 को 51 हजार और 30 सितंबर 2014 को 26 हजार रुपये जमा होने के दस्तावेज दिए।
वादी का आरोप है कि इन कागजातों को लेकर भी रकम वापस करने का भरोसा दिया गया, लेकिन भुगतान नहीं किया गया। रामेश्वर गुप्ता ने आरोप लगाया कि उसकी रकम सहारा में जमा न कराकर किसी अन्य कंपनी में लगाई गई और उसे फर्जी दस्तावेज दिए गए। थानाध्यक्ष रत्नेश दुबे ने कहा कि न्यायालय के आदेश पर आरोपी पर प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है।