अखंड भारत के विभिन्न देशों में रह रहे अन्य धर्मों के लोग राम और कृष्ण की संतानें हैं। यह अटल सत्य है, लेकिन कट्टरपंथी उनको जड़ों से अलग करने में लगे हैं। सनातन कभी सांप्रदायिक नहीं हो सकता, सनातन ही एकमात्र ऐसा धर्म है जो सबको लेकर चलने वाला है। संतों ने धर्म रक्षा के लिये सड़क पर उतरकर लोगों को जोड़ने का आह्वान किया।
धर्म परिषद में महंत सर्वेश्वरण शरण दास, महंत ईश्वर दास, महंत श्रवण दास, महंत राम लोचन दास, महंत सियाराम दास, महंत धनुषधारी दास, महंत अवध बिहारी दास, महंत राजाराम दास, महंत राम दास, महंत महावीर दास, महंत राघव दास, महंत उमेश दास, महंत राम किशोर दास, अनिल शास्त्री, कोतवाल मोहन दास, सोनेश्वर दास, महंत अंकित दास आदि सैकड़ों संत महंत उपस्थित रहे।
अध्यक्षता करते हुए महंत बालक दास ने कहा कि सभी विद्यालयों, विश्वविद्यालयों में वैदिक शिक्षा को अनिवार्य बनाया जाए। वैदिक गणित व वैदिक विज्ञान को अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाया जाए। मठों और मंदिरों के संरक्षण के लिए अलग से विभाग बने। आक्रमणकारियों द्वारा तोड़े गए मंदिरों का पुनर्निर्माण किया जाए।
वैदिक विद्यालयों को अनवरत शिक्षा दे रहे मठों को अनुदान दिया जाए। इसके साथ ही विश्वनाथ कॉरिडोर एवं श्रीराम जन्मभूमि निर्माण को पूर्ण समर्थन दिया गया, धर्मांतरण पर रोक लगे, इस्लामी कट्टरपंथ को रोका जाए। गांव-गांव में रामपंथ द्वारा बनवाए जा रहे श्रीराम परिवार मंदिर को काशी धर्म परिषद का समर्थन और मान्यता के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित किए गए।