वादी ने बताया कि 26 जनवरी 2020 से सौरभ गुप्ता को सीए संजय कुमार गुप्ता की सिफारिश पर नियुक्त किया गया था। फर्म में विभिन्न राज्यों से आने वाले साड़ी व्यापारियों के भुगतान की जिम्मेदारी सौरभ के पास थी, जो चेक पर वादी के हस्ताक्षर के बाद विवरण भरकर भुगतान करता था। जांच में सामने आया कि सौरभ गुप्ता ने कथित रूप से कानपुर के ग्रीन सैल्यूशन, स्काई लाइन वेव सैल्यूशन और स्प्रिंट एशिया नामक फर्जी फर्मों के खातों में 70 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए, जबकि वादी का इन फर्मों से कोई व्यावसायिक संबंध नहीं था। बैंक स्टेटमेंट की जांच के बाद मामले का खुलासा हुआ।
पूछताछ के दौरान सौरभ गुप्ता टालमटोल करने लगा और बाद में मोबाइल बंद कर भाग गया। वादी ने आरोप लगाया कि इस पूरे षड्यंत्र में सौरभ गुप्ता, उसके पिता राजेश गुप्ता और सीए संजय गुप्ता की मिलीभगत है। ब्यूरो