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सुरसरि के तट पर बही भरत शर्मा के गीतों की सुरसरि

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राम ना बिगड़िहें जेकर, केहू ना बिगाड़ी जी...निर्गुण की धुन से सुरसरि के सुरम्य तट पर श्रोताओं को भक्ति के अनूठे स्वरूप से रूबरू कराया। भोजपुरी गायक भरत शर्मा के निर्गुण पर श्रोता देर रात तक झूमे। लोक गायक ने मंच तो सबसे अंत में संभाला लेकिन उनकी सुमधुर प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को अंत तक बांधे रखा। बुधवार को डॉ. राजेंद्र प्रसाद घाट के मुक्ताकाशीय मंच पर नवरात्र महोत्सव की सातवीं संध्या सजाई गई।
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सांस्कृतिक संध्या की शुरूआत सुमन अग्रहरि के देवी भजन से हुई। इसके बाद डॉ. कमला शंकर ने गिटार वादन तथा अदिति चक्रवर्ती का गायन हुआ। इसी क्रम में कलाकार मन्नू यादव, संतोष मिश्र, शैलबाला मिश्रा व ममता शर्मा ने भी मंच पर हाजिरी लगाई। युवा नृत्यांगना सोनी सेठ ने कथक के माध्यम से देवी की आराधना की। तबले पर डॉ. अशेष नारायण मिश्र ने परंपरागत प्रस्तुतियों से मंत्रमुग्ध किया। प्रख्यात लोक गायक भरत शर्मा ने जब मंच संभाला तो दर्शकों ने भी तालियों से उनका स्वागत किया। भरत शर्मा ने अपने गायन की शुरूआत निमिया के डार मईया... से करने के बाद घरहीं में माई के बुलाईब व माई के बसेरवा बा निमिया के डार... समेत कई प्रस्तुतियां दीं।
पर्यटन विभाग, आश्रय सेवा संस्थान व सुबह ए बनारस के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित महोत्सव की शुरुआत धर्मार्थ कार्य मंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी, स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती, जगजीतन पांडेय, डॉ.गणेश दत्त शास्त्री, डॉ. वीरेंद्र प्रताप सिंह, दीपक मिश्रा, श्रीकांत मिश्र व डॉ रत्नेश वर्मा ने संयुक्त रूप से दीप जलाकर की।
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