कमजोर हो चुके इन रजत पत्तरों को इस बार बदला जाएगा। रजत सिंहासन की नए सिरे से मरम्मत कराई जाएगी। इसके लिए महंत परिवार ने कारीगरों से संपर्क साधा है। इस बार रंगभरी एकादशी के उत्सव के जरिए ‘स्वदेशी अपनाओ’ का संदेश दिया जाएगा।
काशी में 19 मार्च को मनाई जाने वाली रंगभरी एकादशी की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस रंगोत्सव में महंत डॉ. कुलपति तिवारी के घर से बाबा के स्वर्ण शिखरों वाले मुक्तांगन के बीच पांच कुंतल से अधिक अबीर-गुलाल उड़ाए जाएंगे। रंगोत्सव पर वर्ष में एक बार शिव परिवार की नयनाभिराम प्रतिमाओं को रजत सिंहासन पर विराजित कराकर गर्भगृह में लाया जाता है।
150 साल बाद इस बार बाबा के रजत सिंहासन की मरम्मत कराने का फैसला किया गया है। इसमें 50 किलो चांदी लगने का अनुमान है। शीशम की लकड़ी से बने सिंहासन पर मढ़ने के लिए चांदी के नक्काशीदार पत्तर जल्द ही तैयार किए जाने लगेंगे। उत्सव की भव्यता के लिए महंत परिवार ने परिधानों को सिलवाने से लेकर सिंहासन सुसज्जित कराने तक की योजना पर काम शुरू कर दिया है।
महंत ने बताया कि रजत पत्तर मढ़वाने के लिए कुशल कारीगरों से संपर्क किया गया है। जल्द ही रजत सिंहासन की मरम्मत का काम शुरू हो जाएगा। इस सिंहासन पर रंगभरी एकादशी की शाम बाबा के बाएं भगवान गणेश को गोद में लेकर पार्वती दर्शन देंगी। शिव परिवार के इस स्वरूप की झलक पाने के लिए काशी समेत देश के कोने-कोने से श्रद्धालु उमड़ेंगे।