गंगा के तट पर विराजमान आदि विश्वेश्वर महादेव के भव्य दरबार का खांका खीचने वाले आर्किटेक्ट पद्मश्री डॉ. विमल पटेल का कहना है कि इस परियोजना में मंदिर की मूल संरचना से बिल्कुल छेड़छाड़ नहीं की गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को पूरा करते हुए बाबा का भव्य दरबार बनाया गया है।
2018 से ही देश के प्रमुख मंदिरों के शिल्पी वास्तुविद और काशी विश्वनाथ मंदिर के मंदिर न्यास परिषद के विशेषज्ञों की मदद से यह परियोजना पूरी हो पाई है। बताया कि काशी विश्वनाथ धाम के निर्माण में विभिन्न वास्तुशैली का समावेश किया गया है, इसमें नागर शैली, आधुनिक शैली का मिश्रण है। इस परियोजना के लिए काशी की सकरीं गलियां और निर्माण की शुरुआत में ही प्राचीन मंदिरों के सामने आने के बाद इन्हें संरक्षित करने की बड़ी चुनौती थी, लेकिन प्रधानमंत्री की दृढ़ इच्छा शक्ति की वजह से ही यह सपना साकार हो चुका है।
पद्मश्री डॉ.विमल पटेल ने बताया कि काशी विश्वनाथ मंदिर की भव्यता को बहाल करने के लिए मंदिर परिषद का पुनर्गठन किया गया है। इसके आसपास की इमारतों को तोड़े जाने के बाद सदियों पुराने मंदिर को भी संरक्षित किया गया है। रात में समूचा परिसर आकर्षक रोशनी से सराबोर परिसर दिव्य और भव्य दिखेगा। बता दें कि डॉ. विमल पटेल ने काशी विश्वनाथ धाम के साथ ही दिल्ली में बन रहे सेंट्रल विष्टा की डिजाइन भी तैयार की गई है। इन्हें 2019 में वास्तुकला के क्षेत्र में पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया था।