वाराणसी के राजघाट पुल पर शोभायात्रा के दौरान भारी संख्या में जयगुरु देव के अनुयायी उमड़ पड़े।
पंकज बाबा का वाराणसी में शोभायात्रा निकालना एक सोची समझी रणनीति का हिस्सा था। मथुरा के जवाहर बाग प्रकरण के बाद पंकज बाबा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कमजोर हुए थे। इससे पहले उन्हें गाजीपुर के मरदह क्षेत्र के रायपुर बागपुर निवासी रामवृक्ष से कड़ी टक्कर मिल रही थी। दोनों के बीच लंबे समय से उत्तराधिकार को लेकर विवाद चल रहा था। लेकिन जवाहर बाग हिंसा में रामवृक्ष मारा गया। उसकी मौत के बाद से पंकज बाबा अपना प्रभाव बढ़ाने में लगे हुए थे। इस शोभायात्रा के बहाने वह रामवृक्ष के क्षेत्र पूर्वांचल में शक्ति प्रदर्शन करना चाह रहे थे। पंकज बाबा और उनके अनुयायी रामवृक्ष को कंस बताते थे।
खुद को जय गुरुदेव का उत्तराधिकारी बताने वाला रामवृक्ष भले ही पुलिस के हाथों मारा गया हो लेकिन अब भी जयगुरुदेव के काफी अनुयायी उसके लोगों के साथ से जुड़े हुए हैं। पूर्वांचल में ऐसे लोगों की संख्या काफी है। रामवृक्ष से जुड़े लोग पंकज बाबा को पसंद नहीं करते। पंकज बाबा ने रणनीति के तहत इस बार वाराणसी में व्यापक शोभायात्रा निकालने की योजना बनाई थी। इसके लिए उत्तर प्रदेश के अलावा छत्तीसगढ़, बिहार और अन्य प्रदेशों के अनुयायियों को बुलाया गया था। सबके लिए बसों की व्यवस्था की गई थी। करीब दो महीने से इसकी प्लानिंग चल रही थी। पंकज बाबा शुक्रवार की शाम ही वाराणसी पहुंच गए थे। यहां से वह कटेसर गए। देर रात तक उन्होंने शोभायात्रा की तैयारियों की समीक्षा की। शोभायात्रा की रिकार्डिंग भी कराई गई थी। शोभायात्रा में शामिल कुछ अनुयायियों ने ही बताया कि उन्हें ज्यादा से ज्यादा लोगों के साथ वाराणसी पहुंचने को कहा गया था। इसकी तैयारी काफी समय से चल रही थी।
मथुरा में दोे जून को जवाहर बाग खाली कराने की रिहर्सल करने गई पुलिस पर रामवृक्ष ने सत्याग्रहियों से गोलाबारी करवा दी थी। इस घटना में अपर पुलिस अधीक्षक मुकुल द्विवेदी एवं थानाध्यक्ष संतोष कुमार के आलावा 22 उपद्रवियों की मृत्यु हुई है। जिसमें 11 लोग आग में झुलसने एवं 11 लोगों की लाठी, डंडों की चोटों से मृत्यु हुई। मृतकों में एक महिला और रामवृक्ष भी शामिल था। 368 अभियुक्त गिरफ्तार किये गये थे। 2014 से रामवृक्ष यादव के नेतृत्व में करीब तीन हजार पुरूष महिलाएं एवं बच्चे स्वाधीन भारत विधिक सत्याग्रह के बैनर तले जवाहर बाग में थे। उद्यान विभाग के कार्यालयों तथा आवासीय भवनों में अनाधिकृत कब्जा कर एवं झोपड़ी एवं टेंट लगाए थे।