उसके लिए सघन बस्ती, सार्वजनिक वितरण गल्ले की दुकानों पर पहुंच कर ग्रामीणों में सैनिटाइजर वितरित करना और जिनके पास मास्क नहीं है, उन्हें मास्क उपलब्ध कराना दिनचर्या बन गई है। बीए की पढ़ाई कर रही छात्रा दिव्या ने बताया कि उसने कौशल विकास योजना के तहत एक वर्षीय नर्सिंग कोर्स किया हुआ है। यहां से उसे कुछ करने की प्रेरणा मिली। वह घर में साफ-सफाई रखने के प्रति भी लोगों को जागरूक कर रही है।
यह है घरेलू सैनिटाइजर बनाने का नुस्खा
दिव्या ने बताया कि नीम के पत्ते, फिटकरी, तुलसी के पत्ते और कपूर मिलाकर सैनिटाइजर बनाया जा रहा है। यह औषधीय गुणों से युक्त होने के साथ ही पूरी तरह से कीटाणु नाशक है। ग्रामीण भी इसमें काफी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। कई परिवारों ने इसे खुद बनाकर उपयोग करना भी शुरू कर दिया है।
दिव्या के अनुसार 10 लीटर पानी, तीन किलोग्राम नीम व एक किलोग्राम तुलसी की पत्तियां, 250 ग्राम फिटकरी,100 ग्राम कपूर और 10 पीस छोटी इलायची मिलाकर खौला देते हैं। खौलते-खौलते जब लगभग छह लीटर बचता है, तब इसको छानकर शीशी में भर देती है। अब तक दिव्या अपनी बहन स्नेहा शर्मा की मदद से करीब दो सौ लोगों में इसे वितरित कर चुकी हैं। पिता श्याम सुंदर शर्मा और मां सरिता शर्मा भी इस कार्य में सहयोग करते हैं।