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ऐसा जिला जहां 17 नदियां और तीन संगम, संरक्षण के अभाव में अपना अस्तित्व खो रही नदियां

Wed, 29 Apr 2020 01:07 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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दुर्वासा धाम। - फोटो : अमर उजाला।
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बात पौराणिक स्थलों की हो, ऋषि-मुनियों की या साहित्य की। इन क्षेत्रों में आजमगढ़ की धरती जितनी समृद्ध है शायद ही कोई और जनपद हो। जनपद अपने आप में एक इतिहास समेटे हैं। जिले से होकर कुल 17 छोटी-बड़ी नदिया गुजरती है। इनके तीन संगम भी हैं। इनका तो अपना विशेष पौराणिक महत्व है। संरक्षण के अभाव में जहां ये नदिया और प्राकृतिक जल स्रोत अपना अस्तित्व खोने को विवश हैं वहीं इतना समृद्ध होने के बाद भी आजमगढ़ जनपद पर्यटन के नक्शे पर अपना मुकाम नहीं बना पाया।

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ये 17 नदियां भी कोई साधारण नहीं हैं। इनमें अधिकतर अपने आप में एक इतिहास समेटे है। लोगों को जीवन देने वाली ये नदियां आज अपनी ही सांसों के लिए मोहताज हो रही हैं। ऐसे नहीं है इनके लिए कोई प्रयास नहीं हुआ। समय-समय पर इनके लिए लोगों ने न सिर्फ आवाज उठाई, बल्कि इनको जीवन देने के लिए नदी में भी उतरे, लेकिन शासन की उदासीनदा के कारण उनका ये प्रयास परवान नहीं चढ़ सका। नतीजा ये रहा कि कुछ नदियों को छोड़ दें तो शेष का प्राकृतिक जलस्रोत सूख चुके हैं। बरसात और नाले का पानी न मिले तो ये सूख कर खेतों का रूप ले लेती हैं।

घाघरा, तमसा और छोटी सरयू सबसे बड़ी
वैसे जनपद में कुल 17 छोटी-बड़ी नदिया हैं। इसमें मुख्य रूप से घाघरा, तमसा और छोटी सरयू हैं। घाघरा नदी जनपद के उत्ती सीमा पर पश्चिम-पूरब की ओर से लगभग 45 किमी की लंबाई में बहती हैं। तमसा नदी जनपद के मध्यभाग से पश्चिम से पूरब की ओर से प्रवाहित होती है। इसके अलावा अन्य नदियों में बेसो, गांगी, मंझुई (मंजूषा), उदन्ती, कुंवर, सीलनी, मंगई, भैंसही, लोनी, दोना, ओरा, बगाड़ी, सुकसुई, कयाड़ आदि भी शामिल हैं। तमसा नदी बाराबंकी जिले से अम्बेडकर नगर होते हुए आजमगढ़ में प्रवेश करती है।

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गंगा नदी। - फोटो : अमर उजाला।
मंजूषा सुल्तानपुर जिले से निकलकर अहरौला होते हुए दुर्वासा में तमसा में मिलती हैं। कुंवर नदी निजामाबाद, छोटी सरयू महराजगंज से होकर गुजरती है। गांगी नदी ठेकमा के जिवली के पास जिले में प्रवेश करती है और गाजीपुर की सीमा में प्रवेश करती हैं। बेसो के मार्टीनगंज ब्लाक के एक ताल से निकलती है और गाजीपुर तक जाती है। उदन्ती लालगंज ब्लाक के एक तालाब से निकलकर मेहनाजपुर की ओर से जाती है। बगाड़ी नदी निजामाबाद के गंधुई बढ़या ताल से निकलकर कुंवर नदी में मिलती है। मंगई नदी जौनपुर से जनपद की सीमा में प्रवेश करती हैं।

इनका है पौराणिक महत्व
दुर्वासा: यह स्थान फूलपुर तहसील मुख्यालय के उत्तर से छह किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह जगह यहां स्थित दुर्वासा ऋषि के आश्रम के लिए काफी प्रसिद्ध है। तमसा-मंजुसा के संगम पर स्थित दुर्वासा ऋषि के आश्रम पर कार्तिक पूर्णिमा पर तीन दिवसीय मेले में देश के विभिन्न हिस्सों से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं।

दत्तात्रेय: निजामाबाद तहसील के तमसा और कुंवर नदी के संगम पर दत्तात्रेय का आश्रम है। यहां भी शिवरात्रि के दिन मेले का आयोजन किया जाता है। चंद्रमा ऋषि ,दत्तात्रेय और दुर्वासा ऋषि यह तीनों लोग सती अनुसूया के पुत्र माने जाते हैं, जो क्रमागत ब्रह्मा,विष्णु और महेश के अवतार माने जाते हैं।
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चंद्रमा ऋषि आश्राम: सदर तहसील के मुजफ्फरपुर के पास तमसा और सिलनी नदीं के संगम पर चंद्रमा ऋषि का आश्रम है। यही भी लोगों की आस्था के केंद्र है। जनपद मुख्यालय से लगभग 5 किलोमीटर पश्चिम में भंवरनाथ से तहबरपुर जाने वाले रास्ते पर पड़ता है।रामनवमी तथा कार्तिक पूर्णिमा पर मेला लगता है। ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल घूमने का स्थान है। यह स्थान सती अनसूया के कहानी से संबंधित है।
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