तहसीलदार न्यायालय ने भूराजस्व अभिलेखों में लालबिहारी को मृतक दिखाकर जमीन को चचेरे भाई पतिराम और बाबूराम के नाम दर्ज कर दिया गया था। इसके बाद लालबिहारी को जब इसकी जानकारी हुई तो उसने खुद को जिंदा करने के लिए लड़ाई लड़नी शुरू कर दी।
पढ़ेंः
'भूत' का आरोप, प्रशासन दे रहा धमकी, फंसाया जा सकता है मुझे
लेकिन 1994 में सीआरओ की जांच आख्या ने पूरे मामले को ही उलट दिया। इसका परिणाम हुआ कि मृतक को भू-राजस्व अभिलेखों में जिंदा कर दिया गया। लेकिन आज दोनों ही आदेशों की फाइलें गायब हो चुकी हैं।
निजामाबाद तहसील से गायब हुए अभिलेखों के मामले में तहसीलदार, लेखपाल सहित कई कर्मचारियों के ऊपर एफआईआर दर्ज हो चुकी है। लेकिन हाईकोर्ट से उन्हें स्टे मिला हुआ है। मुख्य राजस्व अधिकारी आलोक कुमार वर्मा ने बताया सीआरओ की जांच आख्या के अभिलेख गायब होने की रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।