वाराणसी (ब्यूरो)। बनारसियों को दक्षिण भारतीय व्यंजन का स्वाद का चखाने वाले एस. बालाकृष्ण अय्यर उर्फ बालाजी अब इस दुनिया में नहीं रहे। 83 साल के बालाजी का शुक्रवार को गौरीगंज स्थित आवास पर निधन हो गया। काफी दिनों से बीमार चल रहे थे। शाम को हरिश्चंद्र घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। मुखाग्नि बड़े बेटे बाबू अय्यर ने दी।
गोदौलिया स्थिति अय्यर कैफे के मालिक बालाजी के पिता सुब्रमण्यम अय्यर ने महामना मदन मोहन मालवीय केअनुरोध पर 1926 में बीएचयू में साउथ दक्षिण भारतीय व्यंजनों की कैंटीन शुरू की थी। समाजवादी नेता डॉ. राम मनोहर लोहिया ने 1950 में लंका पर सुब्रमण्यम के साउथ इंडियन कै फे का उद्घाटन किया था। यह कैफे उन दिनों छात्र राजनीति का केंद्र हुआ करता था। एस. बालाकृष्ण ने 1953
में गोदौलिया में अय्यर कै फे खोला। बाद में यह कैफे शहर की प्रमुख अडि़यों में शुमार हुआ। देवब्रत मजुमदार जैसे नेताओं की अड़ी होने की वजह से यह सालों तक अंग्रेजी हटाओ सहित कई राजनीतिक आंदोलनों का केंद्र रहा। यहां समाजवादी, मार्क्सवादी, कांग्रेस और संघ के नेताओं का अक्सर जमावड़ा होता था। पांच दशक से अधिक समय तक इस अड़ी के नियमित सदस्य रहे धर्मशील चतुर्वेदी, विजय नारायण, योगेंद्र नारायण, आनंद वर्धन ने बालाजी के निधन पर दुख जताया है।