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आयुष्मान योजना : गोल्डन कार्ड धारकों की भी जेब हो रही खाली, इलाज कराने वालों को नहीं मिल रहा लाभ

Wed, 25 Sep 2019 01:14 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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आयुष्मान योजना - फोटो : अमर उजाला
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आयुष्मान योजना का मकसद है कि जरूरतमंदों को बिना किसी खर्च के इलाज उपलब्ध करवाया जाए। इसे सिस्टम की गड़बड़ी कहें या फिर लापरवाही कि गोल्डन कार्ड धारकों को इलाज और जांच के लिए पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। ऐसे एक दो नहीं बल्कि करीब 200 शिकायतें एक साल में सीएमओ कार्यालय स्थित आयुष्मान योजना के ग्रीवांस सेल में पहुंची हैं।

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आनलाइन और आफलाइन माध्यम से किसी ने जांच तो किसी ने दवा के नाम पर पैसे खर्च करने की शिकायत की है। शिकायतों का स्थानीय स्तर से लेकर राज्य स्तर तक निस्तारण कराया जा रहा है।

जिस तरह की शिकायतें सामने आती जा रही हैं, लोग इस बात को लेकर भी असमंजस में हैं कि आखिर वह कार्ड का लाभ कैसे ले और उनसे क्यों रुपये खर्च कराए जा रहे हैं। योजना के मुताबिक अस्पताल में भर्ती होने के बाद से ही संबंधित मरीजों को सुविधा का लाभ मिलने लगता है।
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सरकार की मंशा है कि कोई भी गरीब बिना इलाज न रहे और उसको पूरा लाभ मिले लेकिन सरकारी और निजी अस्पतालों की स्थिति कुछ और ही है। यहां भर्ती लोगों में कोई दवा तो कोई जांच के लिए रुपये खर्च करने को मजबूर है। इस बारे में अस्पताल प्रबंधन से बात करने के बाद भी उन्हें कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है।

ऐसा तब हो रहा है जब निजी और सरकारी अस्पतालों में ऐसे लोगों के मुफ्त और बेहतर इलाज की बात कही जा रही है। इधर प्रदेश में आयुष्मान योजना का लाभ दिलाने, गोल्डन कार्ड बनाए जाने आदि सुविधाओं के मामले में बनारस पहले स्थान पर है। 

केस-1
पास में था कार्ड फिर भी देने पड़े रुपये
राजातालाब के कचनार निवासी लोलारख का इलाज कुछ दिन पहले हाईवे स्थित एक निजी मेडिकल कॉलेज में हुआ था। यहां जाने पर उन्होंने अपना गोल्डन कार्ड भी दिखाया लेकिन उसे स्वीकार नहीं किया गया। फिलहाल इलाज हुआ और उन्हें अपने जेब से पांच हजार रुपये देने पड़े। लोलारख के मुताबिक उन्हें कोई रसीद भी नहीं मिली। इसकी शिकायत सीएमओ कार्यालय में भी की गई लेकिन किसी ने कोई सुनवाई नहीं की।

केस-दो
कूल्हा प्रत्यारोपण तो हो गया, दवा खरीदनी पड़ी 
चंदौली के उरवा बेरहानी निवासी सुरेंद्र को चलने में तकलीफ हो रही थी। बीएचयू ट्रामा सेंटर में जुलाई में भर्ती हुए। यहां चिकित्सक ने कूल्हा प्रत्यारोपण की बात कही। उनके पास गोल्डन कार्ड होने की वजह से कूल्हा तो बदल दिया गया लेकिन इसके दवा का खर्च परिजनों को वहन करना पड़ा। सुरेंद्र के परिजनों के मुताबिक उन्होंने जब दवा खर्च के बारे में पूछा तो यह जवाब मिला कि कूल्हा प्रत्यारोपण में जो खर्च आया वो ठीक। इसके बाद गोल्डन कार्ड से दवा नहीं मिल सकती है। लिहाजा लोगों को अपने पास से दवा खरीदना पड़ा।

सीएमओ डॉ. वीबी सिंह ने बताया कि आयुष्मान योजना के तहत अस्पतालों में भर्ती मरीजों को योजना के अनुसार इलाज, जांच, ऑपरेशन के लिए कोई चार्ज नहीं देना है। इसमें दवा भी शामिल हैं। पंजीकृत अस्पतालों को भी इस बारे में जानकारी है। इस तरह की शिकायतें मिलने पर उसका त्वरित निस्तारण भी कराया जा रहा है, जिससे मरीजों को कोई असुविधा न हो।
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यहां दे सकते हैं जानकारी
अगर आप योजना से जुड़ी जानकारी हम तक पहुंचाना चाहते हैं तो व्हाट्सएप नंबर 7617566161 पर मैसेज कर सकते हैं। साथ ही  vns-cityreporter@vns.amarujala.com पर भी सूचना दे सकते हैं।
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