ऐसा तब हो रहा है जब निजी और सरकारी अस्पतालों में ऐसे लोगों के मुफ्त और बेहतर इलाज की बात कही जा रही है। इधर प्रदेश में आयुष्मान योजना का लाभ दिलाने, गोल्डन कार्ड बनाए जाने आदि सुविधाओं के मामले में बनारस पहले स्थान पर है।
केस-1
पास में था कार्ड फिर भी देने पड़े रुपये
राजातालाब के कचनार निवासी लोलारख का इलाज कुछ दिन पहले हाईवे स्थित एक निजी मेडिकल कॉलेज में हुआ था। यहां जाने पर उन्होंने अपना गोल्डन कार्ड भी दिखाया लेकिन उसे स्वीकार नहीं किया गया। फिलहाल इलाज हुआ और उन्हें अपने जेब से पांच हजार रुपये देने पड़े। लोलारख के मुताबिक उन्हें कोई रसीद भी नहीं मिली। इसकी शिकायत सीएमओ कार्यालय में भी की गई लेकिन किसी ने कोई सुनवाई नहीं की।
केस-दो
कूल्हा प्रत्यारोपण तो हो गया, दवा खरीदनी पड़ी
चंदौली के उरवा बेरहानी निवासी सुरेंद्र को चलने में तकलीफ हो रही थी। बीएचयू ट्रामा सेंटर में जुलाई में भर्ती हुए। यहां चिकित्सक ने कूल्हा प्रत्यारोपण की बात कही। उनके पास गोल्डन कार्ड होने की वजह से कूल्हा तो बदल दिया गया लेकिन इसके दवा का खर्च परिजनों को वहन करना पड़ा। सुरेंद्र के परिजनों के मुताबिक उन्होंने जब दवा खर्च के बारे में पूछा तो यह जवाब मिला कि कूल्हा प्रत्यारोपण में जो खर्च आया वो ठीक। इसके बाद गोल्डन कार्ड से दवा नहीं मिल सकती है। लिहाजा लोगों को अपने पास से दवा खरीदना पड़ा।
सीएमओ डॉ. वीबी सिंह ने बताया कि आयुष्मान योजना के तहत अस्पतालों में भर्ती मरीजों को योजना के अनुसार इलाज, जांच, ऑपरेशन के लिए कोई चार्ज नहीं देना है। इसमें दवा भी शामिल हैं। पंजीकृत अस्पतालों को भी इस बारे में जानकारी है। इस तरह की शिकायतें मिलने पर उसका त्वरित निस्तारण भी कराया जा रहा है, जिससे मरीजों को कोई असुविधा न हो।
यहां दे सकते हैं जानकारी
अगर आप योजना से जुड़ी जानकारी हम तक पहुंचाना चाहते हैं तो व्हाट्सएप नंबर 7617566161 पर मैसेज कर सकते हैं। साथ ही vns-cityreporter@vns.amarujala.com पर भी सूचना दे सकते हैं।