लोकबंधु राजनारायण और डाॅ. संपूर्णानंद।
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9 अगस्त 1942, अगस्त क्रांति का वह दिन, जब सब कुछ सामान्य सा था। गोविंदपुरा बाजार स्थित एक मकान में क्रांति की रूपरेखा तैयार की जा रही थी। तभी अचानक एक व्यक्ति भीतर आता है और बताता है कि अगस्त क्रांति के आह्वान के साथ महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरोजिनी नायडू, सरदार वल्लभभाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद (तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष), डॉ. राजेंद्र प्रसाद, गोविंद वल्लभ पंत, जे.बी. कृपलानी, पट्टाभि सीतारामैया और असफ अली समेत कांग्रेस के प्रमुख नेताओं को देश के विभिन्न हिस्सों से गिरफ्तार कर लिया गया है।
महात्मा गांधी और राष्ट्रीय नेताओं की गिरफ्तारी की खबर मिलते ही बनारस के व्यापारियों ने स्वत:स्फूर्त विरोध दर्ज कराया। चौक, गोदौलिया, राजादरवाजा, रेशम बाजार और विश्वनाथ गली जैसे मुख्य बाजारों में दुकानें बंद कर दी गईं। बनारस के व्यापारियों ने अंग्रेजों के दमन चक्र और धमकियों के बावजूद कई सप्ताह तक दुकानें नहीं खोलीं, जिससे ब्रिटिश प्रशासन का आर्थिक ढांचा चरमरा गया। बताया जाता है कि इस दौरान ब्रिटिश हुकूमत को हजारों रुपये का नुकसान हुआ।
1942 के भारत छोड़ो आंदोलन (अगस्त क्रांति) के दौरान ब्रिटिश हुकूमत ने आंदोलन को दबाने के लिए बनारस (काशी) के वरिष्ठ राजनेताओं, स्वतंत्रता सेनानियों और छात्र नेताओं को बड़े पैमाने पर गिरफ्तार किया था। 9 अगस्त 1942 को आंदोलन शुरू होते ही डॉ. संपूर्णानंद, पंडित कमलापति त्रिपाठी, दामोदर दास मुंद्रा समेत अन्य नेताओं की गिरफ्तारी की गई थी।
वहीं छात्रों में तत्कालीन बीएचयू छात्र कांग्रेस के अध्यक्ष राजनारायण (लोकबंधु राजनारायण), बीएचयू के प्राध्यापक और छात्र आंदोलन के रणनीतिकार प्रो. कौशिल्यानंद गैरोला, प्रभु नारायण सिंह एवं अन्य छात्र नेताओं को गिरफ्तार किया गया।
भूमिगत होकर लड़ाई लड़ रहे क्रांतिकारियों और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के छात्र नेताओं के लिए व्यापारियों ने आर्थिक संबल प्रदान किया। व्यापारियों ने क्रांतिकारियों को भोजन, राशन और छिपने के लिए सुरक्षित स्थान (गोदाम और आवास) उपलब्ध कराए। आंदोलन की गतिविधियों, पर्चों की छपाई और गुप्त संदेशवाहकों के आवागमन के खर्च के लिए गुप्त रूप से फंड एकत्रित किए। व्यापारियों की दुकानें बन गईं स्वतंत्रता सेनानियों के लिए संपर्क केंद्र: पुरनिए बताते हैं कि तब व्यापारियों की दुकानें और व्यावसायिक ठिकाने स्वतंत्रता सेनानियों के लिए संपर्क केंद्र बन गए थे।
बनारस के इन बड़े नेताओं की हुई थी गिरफ्तारी
डॉ. संपूर्णानंद: बनारस के शीर्ष स्वतंत्रता सेनानी और अग्रणी नेता। 9 अगस्त 1942 को आंदोलन शुरू होते ही उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था।
पंडित कमलापति त्रिपाठी: तत्कालीन वरिष्ठ कांग्रेस नेता। बंबई अधिवेशन से लौटते ही या आंदोलन के शुरुआती चरण में ही ब्रिटिश प्रशासन ने उन्हें गिरफ्तार कर लंबी कैद की सजा दी।
दामोदर दास मुंद्रा: बनारस कांग्रेस कमेटी और स्थानीय स्वतंत्रता गतिविधियों से जुड़े प्रमुख नेता, जिन्हें शुरुआती दौर की धरपकड़ में बंदी बनाया गया।
राजनारायण (लोकबंधु राजनारायण): तत्कालीन बीएचयू छात्र कांग्रेस के अध्यक्ष। उन्होंने पूरे बनारस और पूर्वांचल में भूमिगत रहकर आंदोलन चलाया। ब्रिटिश सरकार ने उन पर 5,000 रुपये का इनाम घोषित किया था। अंततः सितंबर 1942 के अंत में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।