पांच जगहों पर हुई फायरिंग
बनारस में अगस्त क्रांति की मशाल काशी हिंदू विश्वविद्यालय के छात्रों ने जलाई हुई थी। छात्र ही गार्ड थे और छात्र ही पुलिस। पुलिस के सामने कचहरी के लाल भवन व कलेक्ट्रेट पर तिरंगा फहरा देने से छात्रों के हौसले बुलंद थे।
12 अगस्त को छात्रों के गदर को दबाने के लिए पांच जगहों पर फायरिंग हुई। भारत छोड़ो आंदोलन में महिलाएं और कॉलेज की छात्राएं भी पीछे नहीं रहीं। 10 अगस्त को बीएचयू के छात्राओं के एक दल ने कांग्रेस कार्यालय पर हल्ला बोल दिया और पुलिस के कब्जे से छुड़ाकर कब्जा जमा लिया।
ट्रेन के इंजन पर तिरंगा फहराया
14 अगस्त को छात्रों ने लोकल पैसेंजर ट्रेन पर कब्जा जमा लिया और इंजन पर तिरंगा फहराकर उसे बलिया तक ले गए। ज्यों-ज्यों आंदोलन तेज होता गया टेलीफोन और टेलीग्राफ के तार गिरा दिए गए। रेलवे की पटरियां उखाड़ दी गईं।
रेलवे स्टेशन तहस-नहस कर दिए गए। रेलवे स्टेशन, पोस्ट ऑफिस आग के हवाले कर दिए। इलाहाबाद-बनारस-गया-पटना रेलवे लाइन ध्वस्त हो गई। पोस्ट ऑफिस जला दिए गए। जीटी रोड खोद दी गई। बाबतपुर और रजवारी एरोड्रम को भी काफी नुकसान पहुंचा।
मालवीयजी और डाॅ. राधाकृष्णन को किया घर में कैद
आंदोलन को दबाने के लिए ब्रितानिया हुकूमत ने जुल्म की इंतेहा कर दी। एक शक्तिशाली फौज बीएचयू पहुंची और छात्रों से हाॅस्टल खाली करा लिया गया। छात्रों की जमकर पिटाई हुई। उन्हें खींच-खींचकर हाॅस्टल से निकाला गया।
मालवीयजी और डाॅ. राधाकृष्णन के निवास को फौज ने घेर लिया और उन दोनों को घर में ही नजरबंद कर दिया गया। 16 अगस्त को पुलिस ने मुगलसराय और बनारस के बीच एक जगह फायरिंग की जिसमें पांच लोग मारे गए बहुतेरे घायल हुए। शहर में दो नाबालिग बच्चों को गोली मार दी गई।