अतुल सुभाष आत्महत्या मामला
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वीडियो संदेश के जरिये बताया कि जौनपुर की फैमिली कोर्ट में पत्नी सदर कोतवाली के मोहल्ला रुहट्टा निवासी निकिता सिंघानिया ने चार मुकदमे दर्ज कराए थे। आरोप लगाया था कि 26 जून 2019 को उसकी शादी अतुल मोदी से हुई थी। विवाह के बाद से ही ससुराल के लोग 10 लाख रुपये दहेज की मांग को लेकर उसे प्रताड़ित करते थे।
इस सदमे में उसके पिता (निकिता के) की मृत्यु हो गई। परिवार वालों के समझाने पर अतुल उसे बंगलूरू ले गया और 20 फरवरी 2020 को उसे एक बेटा हुआ। इसके बावजूद प्रताड़ना जारी रही। 17 मई 2021 को उसे पीटकर घर से निकाल दिया गया। तब से वह अपने बच्चे के साथ मायके में रह रही है।
निकिता ने अदालत को बताया कि अतुल मोदी बंगलूरू में एक कंपनी में इंजीनियर है। वह सालाना 40 लाख रुपये वेतन पाता है। निकिता ने 16 जनवरी 2022 को अपने और बेटे के लिए दो लाख रुपये प्रतिमाह भरण पोषण की मांग करते हुए फैमिली कोर्ट में मामला दर्ज कराया था, जबकि निकिता की ही सैलरी अच्छी खासी है। कोर्ट ने 29 जुलाई 2024 को पत्नी के संबंध में भरण पोषण का प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया। साथ ही
अतुल को आदेश दिया कि वह बेटे के भरण पोषण के लिए हर महीने 40 हजार रुपये दे। दहेज उत्पीड़न के मुकदमे में भी अतुल सुभाष मोदी ने कोर्ट में हाजिर होकर जमानत कराई थी। घरेलू हिंसा का मुकदमा अभी चल रहा है। मामले की अगली सुनवाई 12 दिसंबर को होनी थी।
(फैमिली कोर्ट की जज, सुभाष अतुल और उनकी पत्नी निकिता सिंघानिया और सास निशा सिंघानिया के बीच कोर्ट रूम में हुई बात)
जज : ये केस सेटल क्यों नहीं कर लेते?
मैं (सुभाष अतुल) : मैडम, ये लोग पहले 1 करोड़ की डिमांड कर रहे थे, आपके अंतरिम रखरखाव के ऑर्डर के बाद 3 करोड़ की डिमांड कर रहे हैं।
जज : फिर होंगे तुम्हारे पास 3 करोड़, इसलिए मांग रही हैं?
मैं (सुभाष अतुल): मैडम, आप याचिका देखिए, इन लोगों ने कैसे इल्जाम लगाया है। मेरे और मेरे परिवार पर। कितने सारे केस डाले हैं। मुझे मेरे बच्चे से नहीं मिलने दे रहे। ये खुद घर छोड़ के गई है। मुझे और मेरे परिवार को परेशान किया जा रहा है। मुझे बंगलूरू से जौनपुर आना पड़ता है।
जज : तो क्या हो गया केस डाल दिए तो। तुम्हारी पत्नी है।
मैं (सुभाष अतुल): मैडम, अगर आप एनसीआरबी का डेटा देखें तो एक लाख आदमी आत्महत्या कर रहे हैं, झूठे मामलों की वजह से।
निकिता सिंघानिया (सुभाष अतुल की पत्नी बीच में टोकते हुए बोली): तो तुम भी आत्महत्या क्यों नहीं कर लेते। इस बात पर जज ने (हंसते हुए) मेरी पत्नी को बाहर जाने को कहा।
जज : ये केस सब झूठे होते हैं। ऐसा ही होता है। तुम अपने और अपने परिवार के बारे में सोचो। ये मामले निपटा लो कर लो। हम तुम्हारी मदद करेंगे।
मैं (सुभाष अतुल): ठीक है मैडम, आप सुझाव दीजिए। लेकिन मेरे पास इतने पैसे नहीं हैं।
जज: हम एडजस्ट कराएंगे, मैं 5 लाख रुपये लूंगी, और मैं सेटलमेंट करा दूंगी। इसी कोर्ट में सब सेटलमेंट हो जाएगा। बहुत ही उचित राशि है, इतना पैसा कमाते हो तुम। निकिता भी एडजस्ट करेगी, नहीं तो जीवन भर तुम और तुम्हारे मां-बाप कोर्ट, कचहरी के चक्कर काटते रहोगे।
मैं (सुभाष अतुल): मैडम मेरे पास इतने पैसे नहीं हैं। हमारे पास सारे सबूत हैं, केस की पूछताछ में मेरी पत्नी की कितनी बातें निकल कर आई हैं। आप हमारा केस मेरिट पर सुनिए।
जज: ठीक है, तुम्हारा केस मेरिट पर ही सुनेंगे। तुम बाहर जाओ।