Prayagraj News : अतीक अहमद। फाइल फोटो
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अतीक को उम्मीद थी कि कोई न कोई प्रमुख राजनीतिक दल उसे समर्थन और सिंबल जरूर देगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। चुनाव लड़ने के लिए अदालत से पैरोल भी नहीं मिल सकी। इसके बाद अतीक ने पत्र जारी कर चुनाव मैदान से हटने की घोषणा की थी। मगर, तब तक देर हो चुकी थी। अतीक का नामांकन पत्र वापस नहीं हो पाया था। चुनावी मैदान से हटने के एलान के बाद भी उसे मत मिले थे।
वाराणसी में अतीक और अशरफ के पैसे से व्यापार
दिल्ली से दूसरों के नाम-पते पर अतीक और अशरफ के गिरोह के लोग होजरी, इलेक्ट्रॉनिक व कॉस्मेटिक उत्पादों के साथ ही पान मसाला मंगवाते हैं। इसके बाद वह सामान बनारस और प्रयागराज के बाजार में खपाया जाता है। यह सब बेहद ही गोपनीय तरीके से होता है। जो सामान दिल्ली से आता है, उसका सीजीएसटी व जीएसटी का भुगतान भी नहीं किया जाता है। अतीक और अशरफ के गिरोह से जुड़े इन लोगों पर भी जल्द ही शिकंजा कसे जाने की तैयारी है।