जहां से 26 अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी निकले, वह कोर्ट सीमेंटेड
यूपी कॉलेज का बास्केटबॉल कोर्ट सबसे ज्यादा बदहाल है। यहां से कुल 26 अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी निकल चुके हैं लेकिन आज भी वहां पर सीमेंटेड कोर्ट पर बच्चे प्रैक्टिस और टूर्नामेंट खेल रहे हैं। करीब 10 से ज्यादा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बचपन में ही इस कोर्ट पर चोटिल हुए हैं। कई के घुटनों का लंबे समय तक इलाज भी चला।
सिगरा का बास्केटबॉल और वॉलीबॉल कोर्ट सीमेंटेड है या सिंथेटिक, इसको लेकर तीन तरह की बात सामने आ रही है। यह देखने में सिंथेटिक और छूने में सीमेंटेड लगता है। कोच का कहना है कि सिंथेटिक कोर्ट है, खेल जानकार इसे सीमेंटेड और क्षेत्रीय खेल अधिकारी सेमी सिंथेटिक बताते हैं। सिगरा में हर दिन 200 से ज्यादा वॉलीबॉल और बास्केटबॉल खिलाड़ी प्रैक्टिस करते हैं। इनमें से 5 से 10 खिलाड़ियों को रोज चोट लगती है।
इस ग्राउंड से निकले तो 10 साल भारतीय कैप्टन रहे
यूपी कॉलेज में बास्केटबॉल के कोच विभोर भृगवंशी ने बताया, कई बार इस मसले को उचित मंचों पर उठाया गया है लेकिन कोर्ट की सूरत नहीं बदली। बच्चे अब भागने-कतराने लगे हैं। अभिभावकों से मोटी फीस वसूलने वाले कई निजी स्कूलों में सिंथेटिक कोर्ट है, लेकिन वहां पर हर किसी की पहुंच नहीं है। अच्छा ग्राउंड होगा तो खिलाड़ी बढ़ेंगे। वर्तमान में भारतीय टीम में विशेष और कुशल सिंह हैं। इसी कोर्ट से निकले विशेष भृगवंशी 10 साल तक कैप्टन रहे। जूनियर में पिछले दो साल में अंतरराष्ट्रीय में नहीं आए। श्रेयांस राज सिंह अंतिम थे।
राष्ट्रीय खिलाड़ियों के घुटने भी खराब
सभी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कर चुके श्रेयांस सिंह, तनीषा सिंह, अंशुमान सिंह, प्रीति कुमारी, श्रेया सिंह, रजनीश यादव, शिवम यादव, भुईया यादव के घुटने खराब हुए हैं। आईआईटी में प्रैक्टिस कर चुके शिवेंद्र सिंह के घुटने में अक्सर शिकायत रहती है। ये कई स्पर्धाओं में मेडलिस्ट रह चुके हैं। वहीं कई जूनियर खिलाड़ियों को भी चोटें आईं मगर नाम बताने से कतराते रहे।
बॉल की उछाल और पैरों के जंप में आ जाता है अंतर
यूपी कॉलेज के बास्केटबॉल कोर्ट पर प्रैक्टिस कर रहीं महिला खिलाड़ियों ने बताया कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इंडोर में खेलना होता है जहां पर मैटिंग या सिंथेटिक कोर्ट होता है। सीमेंट से रबर के कोर्ट पर आने के बाद बॉल की उछाल और पैरों के जंप में काफी अंतर आ जाता है। ग्रिप अच्छे से नहीं बनते और हार का सामना करना पड़ता है। सीमेंटेड कोर्ट की चोट से पंजों और घुटनों को बचाने के साथ बेहतर ग्रिप के लिए आठ से 10 हजार रुपये तक के जूते पहनने पड़ते हैं। सिंथेटिक कोर्ट में सिर्फ 1200 रुपये के जूते में ही काम चल जाएगा।
स्मार्ट सिटी के निदेशक से दो-तीन बार बातचीत हुई है। उनको बच्चों को आ रही समस्याओं और स्थितियों से अवगत कराया गया है। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि योजनाबद्ध तरीके से सिंथेटिक किया जाएगा। - सर्वेश पांडेय, ज्वाइंट सेक्रेटरी, यूपी वॉलीबॉल एसोसिएशन।
सिगरा में बने वॉलीबॉल और बास्केटबॉल कोर्ट सेमी सिंथेटिक या सेमी सीमेंटेड कोर्ट हैं। इनका आधार ठोस सीमेंट का बना हुआ है, लेकिन इनके ऊपर 6-7 लेयर लगती हैं। चोट लगने की घटना कई बार सुनाई देती है। इसको आगे और बेहतर किया जाएगा। ये दोनों इंडोर गेम हैं इसलिए इनको इंडोर किया जाएगा। फिलहाल सिगरा का इंडोर हॉल बैडमिंटन का है। - नवीन कुमार सिंह, क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी
सिगरा स्टेडियम का कोर्ट सिंथेटिक पेंटेड है। खिलाड़ी नियमित प्रैक्टिस करते हैं। - शाकंभरी नंदन, पीआरओ स्मार्ट सिटी