वाराणसी। सात महीने पहले तक जयापुर आम गांव ही था। बिजली-पानी की किल्लत, सड़कों का अभाव। प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले साल सात नवंबर को अपने संसदीय क्षेत्र के इस गांव को गोद लिया तो पूरे देश की नजरें इस पर पड़ी और फिर छह महीने में ही इस गांव की सूरत बदल गई।
गुजरात की कंपनी, कुछ उद्योगपति, कुछ कंपनियां और बैंक विकास के लिए आगे आए। सड़क, शौचालय, कन्या पाठशाला और बोरिंग का काम तेजी से चल पड़ा।
जयापुर की बदलती तस्वीर कहानी यहां खुलीं बैंकों की शाखाएं भी बयां कर रही हैं। यात्री शेड और बस स्टैंड भी बन गया है। लड़कियों के लिए निजी बस सेवा भी शुरू हो चुकी है। गांव में डाकघर भी काम करने लगा है।
आठ बायो टॉयलेट बन चुके हैं। ये सारे काम निजी कंपनियों के कारपोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी फंड (सीएसआर फंड) से कराए गए हैं। वहीं जयापुर में पहुंचते ही छोटे-छोटे 14 मकान ध्यान खींचते हैं। खूबसूरत प्रवेश द्वार जिस पर लिखा है मोदी जी का अटल नगर। पोर्च रोड, सामने मंदिर और हरा-भरा बगीचा। टॉयलेट, बाथरूम और किचन के साथ ही एक बड़े कमरे वाला घर।
यह मकान बनाए गए हैं अनुसूचित जनजाति में आने वाले मुसहर परिवारों के लिए। एक परिवार की जरूरत की हर चीजों का इनमें ख्याल रखा गया है। उध्रर, पीएम के गांव में प्रदेश का सबसे आधुनिक आंगनबाड़ी केंद्र बनकर तैयार है। इसे ‘नंद घर’ नाम दिया गया है।
इमारत को तैयार करने में भूकंपरोधी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। भवन निर्माण में इस बात का ख्याल रखा गया है कि बिजली न रहने पर भी रोशनी और स्वच्छ हवा कमरे तक पहुंचे। यहां आने वाले बच्चों को पढ़ने के लिए किताबें, खेलने के लिए उपकरण और दोपहर में भोजन मिलेंगे।
पीने के लिए साफ पानी भी मिलेगा। वहीं कालीन निर्यात संवर्धन परिषद के सहयोग से गांव में दो बुनकर केंद्र संचालित हो रहे हैं। यहां बुनकरों को कालीन में प्रयोग होने वाले मैटेरियल, उसकी लागत और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उत्पाद की कीमत के बारे में भी जानकारी दी जा रही है। साथ ही, तैयार हो रहे उत्पाद को देश-दुनिया के बाजारों तक पहुंचाने की व्यवस्था भी की गई है।