बीएचयू के वैदिक विज्ञान केंद्र से मालवीय भवन तक करीब दो किलोमीटर लंबी संस्कृत शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में वेदपाठी बटुक स्वस्तिवाचन करते हुए परिसर में बारिश के बीच चलते रहे। संस्कृत में ही ग्रामे -ग्रामे संस्कृत भाषा, नगरे-नगरे संस्कृत भाषा जैसे नारे की गूंज उठी। सबसे आगे बीएचयू के संस्कृत विभाग के अध्यक्ष प्रो. सदाशिव द्विवेदी, वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य और वैदिक विज्ञान केंद्र के समन्वयक प्रो. विनय कुुमार पांडेय और व्याकरण आचार्य प्रो. राम नारायण द्विवेदी के साथ प्रोफेसरों का दल चलता रहा। उनके पीछे शोध छात्रों और वेद पाठियों का समूह रहा।
मालवीय भवन में कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने संस्कृत भाषा में अपने विचार रखे। कहा कि संस्कृत भारत के सांस्कृतिक प्रवाह और ज्ञान-विज्ञान की भाषा है। अनादि काल से यह आध्यात्मिक चर्चा, मीमांसा और तर्क की भाषा रही है। संस्कृत भारती के अखिल भारतीय पत्राचार प्रमुख डॉ. संजीव राय ने कहा कि संस्कृत भाषा अत्यंत ही वैज्ञानिक भाषा है। इसका आयोजन संस्कृत भारती काशी, मालवीय भवन, संस्कृत विभाग और काशी विश्वनाथ मंदिर की ओर से किया गया। इस दौरान प्रो. रविशंकर पांडेय, प्रो. उपेंद्र पाण्डेय, डॉ. सरोज कुमार पांडेय उपस्थित रहे।