प्रो.श्याम सुंदर ने बताया कि एम्फायरगुलिन अणु न केवल सूजन और ऊतक क्षति को रोकता है, बल्कि उन्हें सक्रिय रोग वाले व्यक्तियों से भी अलग कर सकता है। हाल ही में यह शोध कार्य शोध पत्रिका क्लीनिकल एंड ट्रांसलेशनल इम्यूनोलॉजी के नये अंक में प्रकाशित हो चुका है।
प्रो. श्यामसुंदर ने बताया कि कालाजार के लक्षणों में अनियमित बुखार, वजन कम होना, प्लीहा और यकृत का बढ़ना और एनीमिया शामिल हैं। इसके ज्यादातर मामले ब्राजील, पूर्वी अफ्रीका और भारत में होते हैं। दुनिया भर में हर साल करीब 50 से 90 हजार नए मामले सामने आते हैं, जिनमें से केवल 25 से 45 प्रतिशत के बारे में ही विश्व स्वास्थ्य संगठन को जानकारी पहुंच पाती है।
ऐसे व्यक्ति जिनमें कालाजार का कोई लक्षण तो नहीं दिखता है लेकिन परजीवी को अपने शरीर में संयोजित किए रहते है, जो कालाजार का संक्रमण बढ़ाने में मददगार होता है। यह अध्ययन कालाजार के प्रभाव वाले क्षेत्र में रोग का बेहतर प्रबंधन करने में मदद करेगा।