वर्षों से तलहटी तक अतिक्रमण और शहर के नालों का गंदा पानी बहाए जाने के कारण अस्तित्व के संकट से जूझ रही असि नदी के पुनर्जीवन की पहल शुरू हो गई है। शनिवार को नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (एनएमसीजी) के सलाहकार आरएन सिंह ने कहा कि उन्होंने जन सहयोग से असि की सफाई का बीड़ा उठाया है। कभी वाराणसी की पहचान रही इस नदी के पुनरुद्धार के अभियान का श्रीगणेश रविवार सुबह 6.30 बजे होगा। अभियान के प्रथम चरण में श्रमदान होगा। अभियान की प्रेरणा पंजाब में संत सींचेवाल के नेतृत्व में हुई काली बेन नदी की सफाई से ली गई है।
रविवार को नदी की सफाई के लिए श्रमदान शृंखला नगवा से उद्गम स्थल कंदवा तक बनाई जाएगी। इसमें तीन हजार से अधिक होमगार्ड के अलावा नगर निगम से सफाई कर्मी, एनसीसी कैडेट्स, एनएसएस के वालंटियर, स्कूल-कॉलेज विद्यार्थियों के अलावा सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता शामिल होंगे। श्रमदान के लिए मथुरा से यमुना मिशन के कार्यकर्ता भी आ गए हैं। मिशन से जुड़े लोगों ने सहोदर वीर पुलिया (अस्सी) से संकट मोचन पुलिया के बीच सफाई कराने का संकल्प लिया है।
सिंह ने बताया कि नदी की सफाई के लिए तैयार कार्ययोजना के तहत फिलहाल प्रत्येक रविवार को नदी की सफाई के लिए श्रमदान किया जाएगा। कहा- जहां से भी सीवर की पाइप लाइनें असि नदी में जोड़ी गई हैं, वहां संबंधित संस्थानों को गंदे पानी को शोधित किए बिना असि में नहीं बहाने दिया जाएगा। बताया, 160 किमी लंबी काली बेन नदी की सफाई हमारे सामने एक आदर्श के रूप में है । संत सींचेवाल ने जन सहयोग से काली बेन नदी को निर्मल बना दिया। उसी तरह असि भी आने वाले समय में निर्मल हो जाएगी।