टीकाकरण जानलेवा बीमारियों से महफूज रखता है। मगर भ्रांतियों के कारण बहुत से लोग बच्चों को टीके नहीं लगवाते। मिर्जापुर में साई विवेका नंद शिक्षा समिति से जुड़ी आशा मिश्रा ने हर बच्चे और गर्भवती मां को टीके के सुरक्षा घेरे में लाकर महफूज रखने का बीड़ा उठाया।
पिछले 14 वर्षों से वो लोगों को इसके लिए जागरूक कर रही हैं। अबतक 7000 बच्चों और 3000 महिलाओं का बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकरण करवा चुकी हैं।
मिर्जापुर के पांडेयपुर निवासिनी आशा मिश्रा अक्सर सुनती थी कि बच्चों का टीकाकरण नहीं करवाने के चलते वह खसरा, टिटनेस समेत अन्य बीमारी की जद में आ रहे है। जिससे उनकी मौत हो रही है। अक्सर बच्चों के मौत का मामला प्रकाश में आने पर उन्होंने इनको जागरूक करने का मन बनाया।
इसके लिए वह साई विवेका नंद शिक्षा समिति नामक संस्था से जुड़ी। मोटीवेटर के पद पर कार्य करते हुए वह सबसे पहले ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर लोगों में टीकाकरण के प्रति जारूकता पैदा करने लगी। उन्होंने बताया कि टीका लगवाने से कोई परेशानी नहीं होती है। बल्कि इसको लगवाने से बच्चों को सात जानलेवा बीमारी से बचाया जा सकेगा।
धीरे धीरे लोग जागरूक होते गए और अपने बच्चों को टीका लगवाने लगे। जिससे उनको सात जानलेवा बीमारी होने का खतरा टल गया। महिलाओं के गर्भवती होने पर वह उनको स्वास्थ्य केंद्र ले जाकर उनको टीका लगाने का काम भी शुरू किया
ग्रामीण में क्षेत्र में टीकाकरण के प्रति तरह तरह की भ्रांतियां
आशा मिश्रा के सराहनीय काम को देखकर मिला प्रशस्ति पत्र
- फोटो : अमर उजाला
मिर्जापुर जिले के कई गावों में रहने वाले एक वर्ग के लोगों द्वारा बच्चों टीकाकरण नहीं कराया जाता था। इतना ही नहीं उनको पल्स पोलियों की दवा भी नहीं पिलाई जाती थी। कुछ लोगों में भ्रातिंया थी कि बच्चों का टीकाकरण कराने से वह बीमार हो जाते है और किसी न किसी बीमारी की जद में आ जाते है।
यहीं नहीं पल्स पोलियों की दवा पिलाने पर नपुसंकता फैलाता है। इसलिए वह टीकाकरण व पल्स पोलियों की दवा नहीं पिलवाते थे। इसकी जानकारी होने पर आशा मिश्रा इन स्थानों पर गई और उनको जागरूक किया।
जिसके बाद सभी अपने बच्चों को टीका लगवाने लगे और पोलियों की खुराक भी पिलानी शुरू कर दी।
इस वर्ष 74 प्रतिशत बच्चों का ही हो सका टीकाकरण
मिर्जापुर की मुख्य चिकित्साधिकारी डा. विधु गुप्ता ने बताया कि जिले में वर्ष 2016 से मार्च 2017 तक 60 हजार बच्चों का टीकाकरण किया जा सका। जबकि लक्ष्य 70 बच्चों का टीकाकरण का था। लक्ष्य का 74.44 प्रतिशत हिस्सा ही टीकाकरण किया गया। बच्चों को टीकाकरण करने के लिए विभाग की ओर से अभियान चलाया जाता है। बच्चों को इंद्रधनुष मिशन के तहत अभियान चलाकर टीका लगाया जाता है। जिसमें आशा व एएनएम सहयोग करती हैं।
टीकाकरण कराने से यह हैं फायदे
बच्चों में टीकाकरण कराने से भविष्य में बच्चों में होने वाली सात जान लेवा बीमारी से बचाया जा सकता है। इसमें बीसीजी टीबी, पोलियों, हेपेटाईटिस बी, मिजिल्स, डिप्थीरिया, काली खांसी, पोलियो तथा टिटनेस शामिल है। पोलियों की खुराक पिलाने से बच्चो में विकलांगता का खतरा टल जाता है।