उप शास्त्रीय गायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने गुरुवार की पिया को परदेस लेकर जाने वाली सौतन रेलिया को सुरों से सजाया तो युवतियां ठुमके लगाने, थिरकने से खुद को नहीं रोक सकीं। मालिनी की एक पुकार पर दर्शक दीर्घा से निकल कर कई महिलाओं, युवतियों ने मंच संभाल लिया और वह रेलिया बैरन के बोल पर नाच उठीं।
इतना ही नहीं, रंग दे सारी गुलाबी चुनरिया रे.. के बोल पर बनारस घराने के कथक नर्तक सौरभ-गौरव मिश्र की जोड़ी ने भी विरह के भावों पर थिरकन की तिहाई लगाकर फिजा सुरमयी शाम में लय-ताल का अनूठा रस घोल दिया।
लोक गायक मोहन राठौर ने भी भोजपुरी गीतों से समा बांध दिया। भैंसासुर घाट पर सुरगंगा संगीत महोत्सव की सातवीं निशा भोजपुरी के तुलसी कहे जाने वाले लोक कवि भिखारी ठाकुर को समर्पित रही। लोक संगीत के नाम ऐसे ही अद्भुत क्षणों के साथ परवान चढ़ी।
मालिनी ने जब मंच संभाला तो दर्शक दीर्घा से हर हर महादेव के जयगोष के साथ उनका जोरदार स्वागत किया गया। उन्होंने सुकमा में नक्सली हमले में शहीद हुए जवानों को स्वरांजलि अर्पित की। गीत के बोल थे-हमरे देशवा के शान वीर जवान....।
सुंदर सुदूर भूमि में मोरे प्राण बसे रे बटोहिया/ सेजिया पे लोटे काला नाग हो कचौड़ी गली सून कईला बलमू... जैसे उनके गीतों पर भीड़ तालियों की गूंज के साथ थिरकती रही। सिया के जन्म भयो ...सोहर गीत भी प्रस्तुत किया। लोक गायक मोहन राठौर के गीतों पर भी लोग आधी रात तक झूमते रहे।
उन्होंने नीमिया की डारी मईया मोरी ...से शुरुआत की। इसके बाद चैती -पिया निरमोहिया हे रामा....पेश किया। इनसे पहले झारखंड के बोकारो से आई गायिका रंजना राय बधाई गीत -गंगा द्वारे बधईया बाजे...प्रस्तुत किया।
इसके बाद -कोयल बिन बगिया ना सोहे राजा...की प्रस्तुति दी। सरोज वर्मा, गोविंद गोपाल, शैलबाला, नीरज सिंह, अंजू भारती ने भी लोक गीतों की एक से बढ़कर एक प्रस्तुति की। सौरभ मिश्र ने सुरगंगा थीम सांग प्रस्तुत किया।