भावुक शब्दों में उन्होंने कहा था कि बनारसी साड़ी की तरह ही यहां के लोग भी बहुत खूबसूरत हैं। अब तक मैं बनारस नहीं आ सकी, इसका मुझे बहुत अफसोस है। काशीवासियों के प्रेम से अभिभूत होकर उन्होंने कहा कि वह इस स्नेह के आगे कुछ बोल नहीं पा रही हैं।
यूनेस्को के क्रिएटिव सिटी नेटवर्क में काशी को संगीत का शहर घोषित किए जाने के उपलक्ष्य में आयोजित इस विशेष समारोह में शामिल होने आईं आशा भोसले ने पहले ही आयोजकों से साफ कर दिया था कि वह मंच पर गाना नहीं गाएंगी। लेकिन जब हजारों प्रशंसकों ने उनसे गाने की गुहार लगाई, तो वह खुद को रोक नहीं सकीं। उन्होंने कहा, “जब लोग मुझे सुनना चाहते हैं, तो मैं कैसे मना करूं।” इसके बाद उन्होंने अपने चार चुनिंदा नगमे सुनाए, जिन पर पूरी भीड़ तालियों के साथ झूम उठी और उनके साथ गुनगुनाती नजर आई।
अपने आध्यात्मिक पक्ष को साझा करते हुए उन्होंने बताया था कि वह भगवान शिव की गहरी भक्त हैं। अब तक वह 10 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कर चुकी हैं और जल्द ही बद्रीनाथ धाम और अमरनाथ गुफा के दर्शन करने की इच्छा रखती थीं, ताकि द्वादश ज्योतिर्लिंगों की यात्रा पूर्ण कर सकें। आशा भोसले का यह काशी प्रवास उनके जीवन के यादगार पलों में शामिल रहा, जिसे काशीवासी भी लंबे समय तक नहीं भूल पाएंगे।
पीएम के कार्यों की तारीफ की थी
पार्श्व गायिका पद्मभूषण आशा भोसले ने एक दिन बाद यानी सोमवार को बाबा विश्वनाथ के दरबार में हाजिरी लगाई। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ रुद्राभिषेक कर उन्होंने मंगल कामना की। दर्शन-पूजन के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के विकास के एजेंडे की जमकर तारीफ की।
पार्श्व गायिका ने कहा कि ऐसा मजबूत नेतृत्व देश को 50 वर्ष पहले मिला होता तो भारत विकास के पथ पर बहुत आगे निकल गया होता। विश्वनाथ मंदिर के प्रवेश द्वार पर बातचीत के दौरान आशा भोसले ने कहा कि देश को पहली बार अच्छा नेता मिला है।
उन्होंने दो दिन बनारस में बिताने के बाद अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि घाटों से लेकर सड़कों तक स्वच्छता दिख रही है। गंगा तट पर जिस होटल में ठहरी हूं, वहां आसपास के घाटों की सीढ़ियां साफ-सुथरी नजर आईं। इससे लग रहा है कि बनारस विकास की ओर बढ़ रहा है।