मां से कहा कि गोली लगी है, जबकि पत्नी से बताया कि ड्यूटी पर तैनात है। रात में उससे किसी की बात नहीं हो सकी। मोबाइल भी बंद आने लगा। पिता और अन्य दोनों भाई पठान कोट रवाना हो गए।
दो बेटे और एक बेटी का पिता श्यामजी यादव जब घर आया था तो परिजनों से वादा किया था कि अब होली की छुट्टी पर घर आऊंगा। बेसुध पत्नी यही कहते हुए बार-बार अचेत होती रही। दोनों बेटे किशन और नितिन व बेटी नेहा भी पिता की मौत से गहरे सदमे में रहीं। परिजनों के करुण क्रंदन से उपस्थित पड़ोसियों और अन्य रिश्तेदारों की भी आंखें नम हो गईं।