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अर्जुन पुरस्कार पाकर पहली बार बनारस आयीं प्रशांति सिंह, जोरदार स्वागत

Fri, 01 Sep 2017 08:55 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
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एयरपोर्ट पर अपने माता-पिता के साथ प्रशांति सिंह - फोटो : अमर उजाला
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कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकीं बास्केटबाल खिलाड़ी प्रशांति सिंह अर्जुन पुरस्कार पाने के बाद पहली बार बनारस पहुंची। बाबतपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर प्रशांति का फूल- मालाओं से स्वागत हुआ।
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अर्जुन पुरस्कार पाकर बेहद खुश नजर आ रहीं प्रशांति ने कहा कि बनारस में मिली ट्रेनिंग ने उनके कॅरियर को निखारा। उन्होंने कहा कि सुविधाओं की कमी हमेशा रहेगी लेकिन जो है, उसी में प्रयास करना चाहिए।

प्रशांति ने कहा कि बनारस में एक इंडोर स्टेडियम का होना बहुत जरूरी है। इससे नए खिलाड़ियों को प्रैक्टिस करने में बहुत मदद मिलेगी। भारत में क्रिकेट को तवज्जो दिए जाने पर प्रशांति ने कहा कि सभी बोर्ड और फेडरेशन को क्रिकेट से सीखना चाहिए और अपने खेल का व्यवसायीकरण कर उससे पैसा कमाना चाहिए। इससे उस खेल को भी बढ़ावा मिलेगा।
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काशी की बेटी प्रशांति सिंह यूपी की पहली महिला खिलाड़ी हैं जिन्हें यह सम्मान मिला है। खेल दिवस यानी मेजर ध्यान चंद के जन्मदिन पर देश की खेल प्रतिभाओं राष्ट्रपति भवन में खेल पुरस्कार दिए गए।

राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने देश की खेल प्रतिभाओं को सम्मानित विभिन्न खेल पुरस्कारों से सम्मानित किया था। राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस समारोह में 17 खिलाड़ियों को प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से भी नवाजा गया था।

अर्जुन अवार्ड जीतने वाले खिलाड़ियों को पांच लाख रुपये का नगद पुरस्कार तथा प्रशस्तिपत्र दिया गया।
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एक मिनट को हासिल करने में जिंदगी के 15 साल लग गए

बाबतपुर एयरपोर्ट से घर तक बधाई देने वालों का लगा रहा तांता - फोटो : अमर उजाला
100 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेल चुकीं प्रशांति का कहना है कि खेल में एक-एक मिनट का महत्व होता है। अर्जुन अवार्ड समारोह में भी महामहिम से पुरस्कार ग्रहण करने के लिए केवल एक मिनट मिला था। इस एक मिनट को हासिल करने में जिंदगी के 15 साल लग गए। इस दौरान सभी जख्म, दर्द और शिकायतें दूर हो गईं।

उन्होंने कहा कि कॉमनवेल्थ और एशियन गेम में बेहतरीन प्रदर्शन मेरे जीवन में टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ। जब आप टीम के साथ खेलते हैं, तो वहां आप जर्सी नंबर से जाने जाते हैं। मैं 14 नंबर की जर्सी पहनकर खेलती थी।

अर्जुन अवार्ड तक का सफर तय करने में 15 साल लग गए। अवार्ड के लिए पांच बार आवेदन करने यह सफलता मिली है।
इधर, जिला एथलेटिक संघ और हॉकी वाराणसी के पदाधिकारियों ने काशी की बेटी का स्वागत करते हुए कहा कि दूसरे राज्यों की तरह यूपी सरकार को भी प्रशांति को सम्मान देना चाहिए।

कहा कि जिस तरह हरियाणा और पंजाब में खिलाड़ियों को राजपत्रित अधिकारी की नौकरी और फ्लैट देने की घोषणा की गई है, उसी तरह से उत्तर प्रदेश सरकार को भी खिलाड़ियों के सम्मान के लिए आगे आना चाहिए।
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