हरहुआ ब्लॉक के तेवर गांव में डेढ़ माह के कुपोषित बच्चे आदित्य की मंगलवार को दोपहर में मौत हो गई। दो अप्रैल को उसे पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया गया था। अगले दिन भोर में परिवार के लोग लेकर घर चले गए थे। उधर, कुपोषित मासूम की मौत से स्वास्थ्य विभाग में खलबली मची है। जिले में अब तक 12 हजार बच्चे कुपोषित पाए गए हैं।
कुपोषण मुक्ति के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत दो अप्रैल को तेवर गांव में जांच करने चिकित्सकों की टीम पहुंची थी। जांच में दो बच्चे पायल (1 वर्ष) और आदित्य (डेढ़ माह) अति कुपोषित पाए गए थे। दोनों को उसी दिन दीनदयाल अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती करा दिया गया लेकिन अगले दिन भोर में किसी को बताए बगैर आदित्य को लेकर उसके परिवारीजन घर चले गए।
टीम का नेतृत्व कर रहे नोडल मेडिकल आफिसर डॉ. अब्दुल जावेद ने बताया कि आदित्य का वजन केवल एक किलो 800 ग्राम था जबकि उसका वजन चार किलो होना चाहिए। बताया कि घर जाने की जानकारी मिलने के बाद आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और एएनएम को भेजकर आदित्य को विटामिन आदि दिलवाया गया, ताकि उसका वजन बढ़ सके। उन्होंने बताया कि परिवार वालों ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया, जिसकी वजह से मंगलवार को दोपहर उसकी मौत हो गई।
आदित्य के पिता रामप्रसाद और मां तारादेवी ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पोषण पुनर्वास केंद्र में में किसी ने गंभीरता नहीं दिखाई, इसलिए बच्चे को लेकर घर जाना पड़ा। कुपोषित बच्चे की मौत गंभीर मामला है। इस बारे में ब्लॉक के स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी और पोषण पुनर्वास केंद्र से पूछताछ की जाएगी। बुधवार को अधिकारियों की टीम जाकर परिवारीजनों से मुलाकात करेगी। - डॉ. बीबी सिंह, सीएमओ