आवेदन में कहा गया है कि स्थानांतरण आवेदन का विरोध करके देवता के अनेक भक्तों की भावनाओं को वाद मित्र ठेस पहुंचा रहे हैं। राज्य सरकार, भारत संघ और काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट को पक्षकार नहीं बनाया गया। इन संस्थाओं की पक्षकार के रूप में अनुपस्थिति संभावित रूप से कार्यवाही की व्यापकता और प्रभावशीलता को प्रभावित कर सकती है।
इसी तरह काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट आसन्न मंदिर का प्रबंधन करता है और इस मुकदमे के परिणाम में निहित स्वार्थ रखता है। आवेदन में कहा गया कि एक सुस्थापित कानून है कि यदि वाद मित्र मामले को ठीक से नहीं संभाल रहा है। नाबालिग या देवता के हितों की रक्षा नहीं कर रहा है तो न्यायालय द्वारा वाद मित्र को हटाया जा सकता है। ऐसे में वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी को वादी के वाद मित्र के पद से हटाया जाए।
आवेदक की ओर से शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, संकटमोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र और सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन व अश्वनी उपाध्याय का नाम में से किसी एक को लॉर्ड विश्वेश्वर के वाद मित्र के रूप में नियुक्त करने का अनुरोध किया गया है।