लोकसभा चुनाव में पिछड़ी जातियों खासतौर से पटेल और राजभर बिरादरी को साधने की कावयद भाजपा ने शुरू कर दी है। भाजपा से नाराज चल रहे अपना दल (सोनेलाल) को अमित शाह(Amit Shah) ने मना लिया, लेकिन अभी कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर(Om Prakash rajbhar) को मनाना बाकी है। जिसके तहत बुधवार शाम को ही अमित शाह(Amit Shah) ओमप्रकाश राजभर(Om Prakash rajbhar) से मिलेंगे।
शाह से मुलाकात के पहले सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर(Om Prakash rajbhar) ने अपना ‘मांग पत्र’ तैयार कर लिया है। जानकारी के मुताबिक सुभासपा दो सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए अड़ी है। सूत्रों का कहना है कि सपा-बसपा गठबंधन के बाद प्रदेश के मतदाताओं की सोच पाकिस्तान पर एयर स्ट्राइक के बाद फिर बदल गई है। अब सुभासपा भाजपा पर ‘सीमित दबाव’ ही डाल पाएगी।
ओमप्रकाश राजभर ने बनारस में अति दलित-अति पिछड़ा रैली में भारी भीड़ जुटाकर यह साबित कर दिया कि अभी भी पूर्वांचल में उनका जनाधार कम नहीं है। वे अगर अकेले लड़े तो 2018 के लोकसभा चुनाव में बड़े दलों का चुनावी समीकरण बिगाड़ सकते हैं।
बहरहाल, राजभर को साथ रखना भाजपा की सियासी मजबूरी है वहीं, सुभासपा अध्यक्ष की ओर से भी ऐसे संकेत फिलहाल नहीं मिले हैं जिनसे यह माना जाए कि वे एनडीए से अगल हो रहे हैं। अब सबकी नजर अमित शाह से ओमप्रकाश राजभर की मुलाकात पर है, जिसके बाद सूबे के सियासी परिदृश्य में बदलाव दिख सकता है।
एक बात तो तय है कि सुभासपा अध्यक्ष की नजर 2019 नहीं बल्कि 2022 पर है, जब सूबे में विधानसभा के चुनाव होंगे। पार्टी अगले चुनाव के लिए इतनी मजबूत जमीन तैयार करना चाहती है कि 2022 में सभी दल उससे तालमेल के लिए मजबूर हो जाएं।