शिव कुमार सिन्हा ने कहा कि एक अधिवक्ता ने चार साल तक वीडीए में भागदौड़ की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। अधिकारी कहते थे कि बाबू को पैसा देकर मामला निस्तारित करा लीजिए। बाबू कहता था कि आप जो पैसा देंगे, उसमें अफसरों को भी हिस्सा देना पड़ता है। शिव कुमार सिन्हा ने कहा कि जब एक अधिवक्ता का यह हाल है तो वीडीए में आम आदमी का काम कैसे होता होगा, यह सोचने वाली बात है।